खूबसूरत दिखना भला किसे अच्छा नहीं लगता। प्रयत्न भी कमोबेश सभी करते ही हैं। हां, महिलाओं में यह आकांक्षा कुछ ज्यादा ही होती है। नारी प्रकृति की सर्वोत्तम रचनाओं में से एक है, इसमें कोई शक नहीं।
प्रकृति जिस प्रकार सुंदर फूलों की रचना करती है लेकिन समय के साथ-साथ वे भी मुरझाने लगते हैं, ठीक उसी प्रकार तीस-पैंतीस वर्ष की अवस्था के बाद नारी शरीर में तेजी से परिवर्तन होने लगता है। शरीर में कमजोरी और सौंदर्य का हृास होने लगता है। यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, अतः घबराने की बात नहीं।
यदि आप अपने ऊपर थोड़ा सा भी ध्यान दे सकती हैं तो आप वर्षों जवां दिख सकती हैं। बस जरूरत है कुछ नुस्खे अपनाने की। विभिन्न प्रकार के बाजारू सौंदर्य प्रसाधनों से अपने चेहरे को कुछ समय के लिए तो आकर्षक बनाया जा सकता है लेकिन यदि वास्तविक और स्थायी सौंदर्य चाहिए तो कुछ प्राकृतिक नियम व नुस्खे अपनाना ज्यादा श्रेयस्कर है यथा:
बनी-बनाई क्रीम में रासायनिक तत्व ज्यादा होते हैं जो त्वचा पर तत्काल प्रभाव डालते हैं जिससे अस्थायी सौंदर्य तुरंत प्राप्त होता है। इसकी बजाए घर पर रोजमर्रा में उपयोग की जाने वाली मसूर दाल, दूध, हल्दी, बादाम, तिल के तेल, चना का बेसन आदि द्वारा खुद तैयार किए गए उबटन का नियमित प्रयोग सौंदर्य देता है।
नियमित व्यायाम शरीर को सुडौल और चुस्त-दुरूस्त रखने में सहायक है।
जितना संभव हो, अपने-आप को व्यस्त रखना चाहिए। इससे शरीर के सारे अंग संचालित होते हैं और रक्त-संचरण सामान्य रहता है जिससे शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। ज्यादा देर तक बेकार बैठे रहने की आदत से काम करने की क्षमता कम होती है और शरीर बेडौल होता जाता है।
संभव हो तो हर अंग का अलग से नियमित व्यायाम करें जैसे नहाते समय यदि चंद पल मुंह में पानी भर कर रखा जाय तो इससे शिराओं का व्यायाम होता है जिससे चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती।
फैशन के नाम पर तंग कपड़े पहनना आम बात है। यह मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव डालता है जो कई परेशानियों को जन्म देता है। हल्के और आरामदेह कपड़े शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक हैं।
खासकर गर्मियों में आंखों को ठंडे जल से धोना बहुत राहत पहुंचाता है। आंखों में गुलाबजल डालने से भी आराम मिलता है। खाने में आंवले और बादाम के व्यंजन आंखों को स्वस्थ रखने में लाभकारी हैं।
भरपूर नींद भी आवश्यक है, अतः रोज छः से आठ घंटे सोने के लिए भी वक्त निकालना चाहिए।
तनाव में जीना शीघ्र ही बुढ़ापा ला देता है, अतः व्यापक दृष्टिकोण अपनाइए। तनाव से मुक्ति मिलेगी।
भोजन में ज्यादा से ज्यादा ताजे मौसमी फल और हरी सब्जियों का प्रयोग लाभकारी है।
अमेरिका के जाने-माने मनोवैज्ञानिक रोबर्ट होल्डन के अनुसार हंसना भी स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। यह जवान और जोशीला बनाए रखता है। महात्मा गांधी ने भी इसे स्वीकारा है।
