हरियाणा में राज्यसभा चुनाव: संतीश नंदाल ने निर्दलीय के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया

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चंडीगढ़, पांच मार्च (भाषा) वर्ष 2019 में हरियाणा विधानसभा के चुनाव में हार चुके सतीश नंदाल ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा चुनाव के लिए हरियाणा से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया।

नंदाल ने रोहतक जिले के गढ़ी-सांपला-किलोई निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन हार गये थे।

हरियाणा से राज्यसभा की दो सीट खाली हो रही हैं। भाजपा की किरण चौधरी और राम चंद्र जांगड़ा का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो रहा है।

बृहस्पतिवार को इससे पहले भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध ने हरियाणा से खाली हो रही राज्यसभा की दो सीट के चुनाव हेतु यहां अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

जब नंदाल नामांकन पत्र दाखिल कर रहे थे तब उनके साथ तीन निर्दलीय विधायक – सावित्री जिंदल, राजेश जून और देवेंद्र कदयान भी मौजूद थे। ये तीनों विधायक हरियाणा में नायब सिंह सैनी सरकार का समर्थन कर रहे हैं।

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 48 विधायक, कांग्रेस के पास 37, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के पास दो विधायक हैं, जबकि तीन निर्दलीय विधायक सत्तारूढ़ दल का समर्थन कर रहे हैं। दो उम्मीदवारों को हरियाणा से राज्यसभा पहुंचने के लिए 31-31 वोट की जरूरत है।

भाजपा के भाटिया (58) को केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है।

चुनाव संबंधी अधिसूचनाएं 26 फरवरी को जारी की गईं। आवश्यकता पड़ने पर मतदान 16 मार्च को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक होगा और मतों की गिनती उसी दिन शाम पांच बजे होगी।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि पांच मार्च है। नामांकन पत्रों की जांच छह मार्च को होगी, जबकि उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि नौ मार्च है।

निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में जारी चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, हरियाणा, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु समेत 10 राज्यों में राज्यसभा की 37 सीट दो और नौ अप्रैल को रिक्त हो रही हैं।

अगस्त 2024 में, पूर्व मंत्री किरण चौधरी हरियाणा से राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध चुनी गई थीं। वह अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं।

कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा के रोहतक से लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद राज्यसभा उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था। उनका राज्यसभा में कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त होता।

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