कोल्लम (केरल), छह मार्च (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा समय में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोग ‘‘अंधकार की ओर बढ़ रहे हैं’ और ज्ञान से दूर हो रहे हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने यह भी कहा कि चाहे राजनीति हो या अंतरराष्ट्रीय संबंध, दूसरे व्यक्ति को समझने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है और असहमति से मुकाबला करने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा, ‘‘आज हम अपनी राजनीति में, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देखते हैं कि हर कोई अंधकार की ओर भाग रहा है और ज्ञान से दूर जा रहा है। दूसरे व्यक्ति को समझने की कोई कोशिश नहीं की जाती है, आप बस उन्हें बम से उड़ा देते हैं और मार देते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हमारी राजनीति में भी ऐसा ही है। आप किसी से सहमत नहीं हैं, आप उस व्यक्ति पर हमला करते हैं या उनके प्रति हिंसक हो जाते हैं।”
वह यहां महात्मा गांधी और सुधारवादी संत श्री नारायण गुरु के बीच हुई मुलाकात के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और नारायण गुरु दोनों ऐसी हिंसा के खिलाफ थे और लोगों के बीच प्यार, सम्मान, क्षमा और समझ की पैरोकारी करते थे।
राहुल गांधी के अनुसार, किसी के लिए भी नारायण गुरु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने पुष्प अर्पित करना आसान है, लेकिन चुनौती उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करने की है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि महात्मा गांधी ने उस समय दुनिया के सबसे मजबूत साम्राज्य से लड़ाई लड़ी थी और अंग्रेजों ने उनसे जो भी सुलूक किया हो, बापू पर कोई असर नहीं हुआ।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘अंग्रेजों के खिलाफ महात्मा गांधी की लड़ाई से मुझे एहसास हुआ कि ‘पॉवर’ (शक्ति) और ‘फोर्स’ (बल) के बीच अंतर है।”
उन्होंने कहा, ‘‘अंग्रेजी साम्राज्य के पास बल था, लेकिन उनके पास कोई शक्ति नहीं थी। गांधीजी के पास कोई बल नहीं था, लेकिन उनके पास सच्चाई थी, इसलिए उनके पास शक्ति थी। उसी तरह, नारायण गुरुजी के पास कोई बल नहीं था, उनके पास बहुत धन नहीं था, वह महंगी कार में नहीं चलते थे, लेकिन वह अपने समय में केरल के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति थे।”
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘उनकी शक्ति की कल्पना कीजिए कि सौ साल बाद केरल का पूरा राजनीतिक वर्ग उनकी स्मृति में यहां आया है।”
उन्होंने कहा, “भारत में राजनीतिक लड़ाई भी बहुत समान है। एक तरफ सत्य, अहिंसा, विनम्रता है और दूसरी तरफ क्रोध, हिंसा, घृणा और अहंकार है। हिंसा और क्रोध वाले लोगों के पास बल हो सकता है, लेकिन उनके पास कोई शक्ति नहीं है क्योंकि नारायण गुरुजी और महात्मा गांधी जी जैसे लोगों की भावना और वास्तव में, भारत की भावना मूल रूप से सत्य और अहिंसा के विचार पर आधारित है।’’