एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन के इस्तीफे पर कोई बड़ी चिंता की बात नहीं: आरबीआई

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मुंबई, 19 मार्च (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि बैंक के आचरण या शासन के संबंध में कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है।

एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद केंद्रीय बैंक ने यह बात कही।

आरबीआई ने बयान में कहा, ‘‘ एचडीएफसी बैंक एक घरेलू प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक (डी-एसआईबी) है जिसके पास मजबूत वित्तीय स्थिति, पेशेवर तरीके से संचालित बोर्ड और सक्षम प्रबंधन दल है। हमारे समय-समय पर किए गए आकलन के आधार पर, इसके आचरण या शासन के संबंध में कोई बड़ी चिंता नहीं है।’’

बयान में जोर दिया गया कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और उसकी वित्तीय स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। साथ ही पर्याप्त नकदी भी मौजूद है।

यह बयान देश के दूसरे सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के 18 मार्च 2026 से अचानक इस्तीफे देने के बाद आया है। उन्होंने नैतिक चिंताओं का हवाला दिया था। यह पहली बार है जब एचडीएफसी बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में पद छोड़ा है जिससे इसके कामकाज को लेकर चिंताएं उठी हैं।

आरबीआई ने बैंक के अनुरोध पर उसके अंशकालिक चेयरमैन के पद को लेकर एक अंतरिम व्यवस्था को मंजूरी दी है।

एचडीएफसी बैंक के आवेदन पर भारतीय रिजर्व बैंक ने 18 मार्च 2026 को केकी मिस्त्री को 19 मार्च 2026 से तीन महीने की अवधि के लिए अंतरिम अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।

बयान में कहा गया है कि आरबीआई आगे की कार्रवाई को लेकर निदेशक मंडल और प्रबंधन के साथ जुड़ा रहेगा।

यह पहली बार है जब एचडीएफसी बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में पद छोड़ा है। इससे बैंक के कामकाज को लेकर सवाल उठे हैं। उनका कार्यकाल चार मई 2027 को समाप्त हो रहा था।

उन्होंने 17 मार्च को भेजे अपने इस्तीफे में कहा, ‘‘ पिछले दो वर्ष में बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाओं व प्रथाओं को मैंने देखा है जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों एवं नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे इस निर्णय का आधार है।’’

शासन, नामांकन, पारिश्रमिक समिति के चेयरमैन एच. के. भनवाला को लिखे पत्र में चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘ उपरोक्त के अलावा मेरे इस्तीफे का कोई अन्य महत्वपूर्ण कारण नहीं है।’’

चक्रवर्ती को आर्थिक मामलों के सचिव के रूप में सेवानिवृत्ति के करीब एक वर्ष बाद पांच मई 2021 से अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

उनका कार्यकाल 2024 में तीन और वर्ष के लिए बढ़ाकर चार मई 2027 तक कर दिया गया था। चक्रवर्ती 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं और अप्रैल 2020 में आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए।

इससे पहले वह निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) के सचिव थे। ये दोनों विभाग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं।

चक्रवर्ती बैंक की मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड के साथ ‘रिवर्स मर्जर’ प्रक्रिया के दौरान चेयरमैन बने थे, जो देश की प्रमुख आवासीय वित्त कंपनी है।

एचडीएफसी लिमिटेड का एचडीएफसी बैंक में विलय एक जुलाई, 2023 से प्रभावी हुआ जिससे 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त बही-खाते वाली एक विशाल वित्तीय इकाई का निर्माण हुआ।

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