नेपाल चुनाव: आरएसपी के बालेंद्र शाह ने 18 जीत पर दर्ज की, 99 पर आगे
Focus News 7 March 2026 0
काठमांडू, छह मार्च (भाषा) रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) नेपाल में सितंबर में हुए ‘जेन जेड’ के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद हुए पहले आम चुनाव में शनिवार को भारी जीत की ओर अग्रसर है।
राजनीतिक रूप से अस्थिर राष्ट्र में स्थापित राजनीतिक दलों के प्रभुत्व को ध्वस्त करते हुए आरएसपी के इस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने की संभावना है।
नेपाल के निर्वाचन आयोग के हालिया आंकड़ों के अनुसार, आरएसपी ने 18 सीट पर जीत दर्ज की है और 99 अन्य सीट पर पार्टी आगे है।
भारत इस चुनाव पर करीब से नजर रख रहा है। वह राजनीतिक रूप से अस्थिर हिमालयी देश में एक स्थिर सरकार की उम्मीद कर रहा है ताकि दोनों पक्षों के बीच विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में कहा, ‘‘हम पारस्परिक लाभ के लिए अपने दोनों देशों और लोगों के बीच मजबूत बहुआयामी संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए नेपाल की नयी सरकार के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारत ने ‘‘नेपाल में शांति, प्रगति और स्थिरता का लगातार समर्थन किया है और अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, इन चुनावों के लिए नेपाल सरकार के अनुरोध के अनुसार साजोसामान संबंधी आपूर्ति प्रदान की है’’।
नेपाली कांग्रेस ने चार सीट जीती हैं और 11 अन्य सीट पर पार्टी आगे है जबकि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी)(सीपीएन-यूएमएल) ने एक सीट जीती है और 11 सीट पर वह आगे है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने दो सीट जीती हैं और 10 सीट पर आगे है। श्रम संस्कृति पार्टी अब केवल तीन सीट पर आगे है, जबकि पहले वह छह सीट पर आगे थी।
संसद के कुल 275 सदस्यों में से 165 सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के माध्यम से होगा, जबकि शेष 110 सदस्यों को आनुपातिक विधि से चुना जाएगा।
नेपाल में हुए इस आम चुनाव में लगभग 1.89 करोड़ मतदाता प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों को चुनने के पात्र थे जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने बृहस्पतिवार को मतदान किया।
प्रत्यक्ष मतदान के तहत 165 सीट के लिए लगभग 3,400 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं और आनुपातिक मतदान के माध्यम से 110 सीट के लिए 3,135 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।
पिछले साल आठ और नौ सितंबर को दो दिन तक जारी रहे ‘जेन जेड’ के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली सत्ता से हटना पड़ा था। ओली नेपाली कांग्रेस के समर्थन से बनी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जिसे लगभग दो-तिहाई बहुमत प्राप्त था।
‘जेन जेड’ पीढ़ी से तात्पर्य 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों से है।
ओली के सत्ता से हटने के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 12 सितंबर को प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और सुशीला कार्की को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
‘जेन जेड’ द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, सुशासन, भाई-भतीजावाद का अंत, राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत परिवर्तन आदि हैं।
‘बालेन’ के नाम से जाने जाने वाले 35 वर्षीय इंजीनियर के नेपाल का अगला प्रधानमंत्री बनने की संभावना है, जो स्थापित दलों के प्रति जनता की अस्वीकृति को दर्शाता है। नेपाल में पिछले 18 वर्षों में 14 सरकारें बन चुकी हैं।
