निर्णय लेने की क्षमता, रचनात्मकता जैसे कौशल पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता: पूर्व यूजीसी प्रमुख

0
e3dses

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व प्रमुख एम जगदीश कुमार ने शनिवार को कहा कि कार्य जगत में आज तेजी से बदलाव हो रहे हैं, नियमित कार्यों का स्वचालन हो रहा है, तथा निर्णय लेने की क्षमता, रचनात्मकता और नैतिक तर्क जैसे कौशल पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

कुमार ने यह बात राष्ट्रीय सेविका समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘भारती नारी से नारायणी: महिला विचारकों का राष्ट्रीय सम्मेलन’ में ‘ज्ञान ही शक्ति है’ विषय पर हुई चर्चा के दौरान कही।

उन्होंने कहा, ‘‘तीन क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। पहला क्षेत्र ज्ञान है। अब हम सभी के लिए अपार जानकारी उपलब्ध है। हमारे सामने चुनौती यह है कि हम इस जानकारी को उपयोगी ज्ञान में कैसे बदलें ताकि यह हमारे निर्णय और कार्यों में हमारा मार्गदर्शन कर सके। और यह तभी संभव है जब हमारे युवा प्रश्न पूछने, आलोचनात्मक रूप से सोचने और जो कुछ वे देखते हैं उसे समझाने की क्षमता विकसित करें।’’

कुमार ने कहा, ‘‘दूसरा क्षेत्र जहां तेजी से बदलाव हो रहे हैं, वह कार्यक्षेत्र है। चूंकि कई नियमित कार्य स्वचालित हो जाएंगे, इसलिए अब हमें निर्णय लेने की क्षमता, रचनात्मकता, विषय का ज्ञान, नैतिक तर्क और टीम में काम करने की क्षमता जैसे उच्चस्तरीय कौशल पर ध्यान केंद्रित करना होगा।’’

कुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि तीसरा क्षेत्र जहां तेजी से बदलाव हो रहे हैं, वह सत्ता का क्षेत्र है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज केवल वही देश जो कंप्यूटिंग, डेटा और मॉडल को नियंत्रित करते हैं, बाजारों, संस्कृति और समाज को आकार देते हैं। इसलिए, हमारे सामने चुनौती यह है कि हम अपने युवाओं, विशेषकर देश की महिलाओं को कैसे प्रशिक्षित और शिक्षित करें, ताकि वे सफल होने की क्षमता विकसित कर सकें।’’

कुमार ने कहा कि पहली चुनौती स्कूली शिक्षा प्रणाली और उच्च शिक्षा प्रणाली से ‘ड्रॉपआउट’ (बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने) की समस्या का समाधान करना और यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक महिलाएं तथा लड़कियां हमारी शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनें।

उन्होंने कहा, ‘‘दूसरा सवाल यह है कि हम अपने छात्रों को आलोचनात्मक विचारक, कर्मठ और स्वप्नदृष्टा बनने में सक्षम बनाने के लिए पाठ्यक्रम कैसे तैयार करें, और यहीं पर शिक्षा की बात आती है, तो इसका अर्थ समग्र शिक्षा होना चाहिए। शिक्षा का मतलब केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि प्रमाणों के साथ दक्षता हासिल करना है।’’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *