युवाओं में धूम्रपान की लत की एक वजह फिल्में और वेबसीरीज भी : भाजपा सदस्य तनावड़े

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नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) फिल्मों और वेब सीरीज का बच्चों, किशोरों और युवाओं पर प्रभाव पड़ने का जिक्र करते हुए भारतीय जनता पार्टी सांसद सदानंद महालू शेट तनावड़े ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि निर्माताओं को सामग्री का चयन बहुत सोच-समझ कर करना चाहिए।

भाजपा सदस्य तनावड़े ने कहा कि फिल्मों में, वेब सीरीज में जो कुछ दिखाया जाता है उससे बच्चे, किशोर और युवा खास तौर पर प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा ‘‘फिल्मों और वेब सीरीज में बच्चे, किशोर और युवा जो कुछ देखते हैं वह अक्सर उसकी नकल करते हैं। पहले भी यह कहा जा चुका है और अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि फिल्म में नायकों से प्रभावित हो कर बच्चे, किशोर और युवा उनके जैसे कदम उठाते हैं।’’

तनावड़े ने कहा कि बच्चे, किशोर और युवा अपने पसंदीदा नायक को धूम्रपान करते देख तेजी से धूम्रपान की ओर आकर्षित होते हैं और यह शुरुआती शौक जल्द ही निकोटिन की लत में बदल जाता है। ‘‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत में युवाओं की आबादी अधिक है।’’

उन्होंने कहा कि यह बात सर्वविदित है कि धूम्रपान सेहत के लिए नुकसानदायक होता है और निकोटिन समय से पहले कई बीमारियों तथा मौत की वजह बनता है।

उन्होंने मांग की कि फिल्मों और वेब सीरीज में ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया जाना चाहिए जो बच्चों, किशोर और युवाओं के भविष्य के लिए घातक हो।

इसी पार्टी की धर्मशीला गुप्ता ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की नियमित देखभाल एवं रखरखाव किए जाने की मांग करते हुए कहा कि देश की बड़ी आबादी आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन के संसाधनों का उपयोग करती है।

उन्होंने अलीगढ़ की एक घटना का जिक्र किया जब करीब आठ साल की एक बच्ची बस का जर्जर फर्श टूट जाने से नीचे सड़क पर गिर गई और बस का पिछला पहिया उसके ऊपर से गुजर गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

गुप्ता ने कहा कि अगर बस का रखरखाव किया जाता, या अत्यंत खस्ताहाल हो चुकी बस को सेवा से हटा दिया जाता तो न यह हादसा होता और न बच्ची की जान जाती।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी ने होमियोपैथी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा की एक प्राचीन विधा है और आदिवासियों को इसका खासा ज्ञान है। जड़ी-बूटियों के उपयोग की गहरी जानकारी रखने वाला यह समुदाय ही इसे आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि होमियोपैथी का न तो पर्याप्त दस्तावेजीकरण किया गया और न ही इसे सरकारी संरक्षण मिला। होमियोपैथी के प्राकृतिक चिकित्सा ज्ञान को अगर समुचित तरीके से संरक्षण दिया जाए तो इसमें बड़ी बीमारियों के इलाज की भी क्षमता है।

महुआ ने मांग की कि इस विधा के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान किया जाए और झारखंड में अनुसंधान के लिए संस्थान स्थापित किए जाएं।

राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने ऑनलाइन कन्सल्टेन्सी को लेकर कड़े नियम बनाने, ई-फार्मेसी को सख्त बनाने और नियमों का कड़ाई से पालन किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लंबित फार्मेसी नियमावली को भी अद्यतन किया जाना चाहिए।

भाजपा के बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने खेल अवसंरचनाओं के सुदृढ़ीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं और यह सिलसिला जारी है।

उन्होंने कहा ‘‘लेकिन राज्य में युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए और परियोजनाओं की जरूरत है।’’

देसाई ने कहा ‘‘गुजरात में अहमदाबाद के नारणपुरा इलाके में सावरकर खेल परिसर (वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) बनाया गया है। 825 करोड़ रुपये की लागत से 21 एकड़ में फैला यह गुजरात का सबसे बड़ा अत्याधुनिक खेल परिसर है, जिसका उद्घाटन सितंबर 2025 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। यह केंद्र ओलंपिक स्तर की सुविधाओं से सुसज्जित है।’’

उन्होंने मांग की कि राज्य के हर जिले में इस तरह का खेल परिसर बनाया जाए।

शून्यकाल में ही भाजपा के गुलाम अली, बालयोगी उमेशनाथ, रामभाई मोकरिया, सुमेर सिंह सोलंकी, माया नारोलिया, सतपाल शर्मा, कांग्रेस के नीरज डांगी, रजनी अशोकराव पाटिल, डॉ सैयद नासिर हुसैन, बीजू जनता दल के देवाशीष सामंत राय और नेशनल कॉन्फ्रेंस के चौधरी मोहम्मद रमजान ने भी आसन की अनुमति से लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने मुद्दे उठाए।

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