महासप्तमी 2026: मां कालरात्रि की कथा – जानें क्यों माता पार्वती ने लिया था यह उग्र रूप, हर भय होगा दूर!

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Maa Kalratri - Navratri Focus News

चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की उपासना करने से भक्तों को हर दुख, भय और परेशानी से शीघ्र छुटकारा मिल जाता है। नवरात्रि की सप्तमी तिथि को महासप्तमी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। कालरात्रि देवी पार्वती का सबसे उग्र और भयंकर रूप है, लेकिन वह अपने भक्तों को अभय एवं वरद मुद्रा द्वारा आशीर्वाद प्रदान करती हैं। उग्र रूप में विद्यमान अपनी शुभ अथवा मंगलदायक शक्ति के कारण देवी कालरात्रि को देवी शुभंकरी के नाम से भी जाना जाता है। ✨

🔥 नवरात्रि के सातवें दिन की कथा (मां कालरात्रि व्रत कथा)
पौराणिक कथा के अनुसार, माता ने शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज नामक राक्षसों का वध करके देवी-देवताओं और मनुष्यों की रक्षा की थी। कथा है कि एक बार शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज के आतंक से तीनों लोक थर-थर कांपने लगे। चारों ओर इन राक्षसों का भय व्याप्त था। तब समस्त देवी-देवता भगवान शिव के पास इस समस्या का समाधान पाने के लिए गए।

महादेव ने माता पार्वती से शुंभ-निशुंभ का अंत करने की बात कही। इसके बाद माता ने दुर्गा रूप धारण कर शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया। हालांकि, जब रक्तबीज का संहार करने माता गईं, तो एक समस्या सामने आई। रक्तबीज को यह वरदान मिला था कि उसके रक्त की बूंद धरती पर गिरते ही उसके जैसा एक और राक्षस जन्म लेगा।

तब माता दुर्गा ने अपने तेज से मां कालरात्रि का रूप धारण किया। माता कालरात्रि ने रक्तबीज के रक्त को धरती पर नहीं गिरने दिया और गिरने से पहले ही उसे अपने मुंह में भर लिया। इस तरह माता कालरात्रि ने अंत में रक्तबीज का भी संहार कर दिया।

मां कालरात्रि न केवल दुष्टों का विनाश करती हैं, बल्कि अपने भक्तों के लिए वे शुभ फलदायी हैं। 🙏

🎨 नवरात्रि का सातवां दिन – शुभ रंग और भोग
नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग पहनना शुभ होता है। वहीं इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ और मालपुआ का भोग लगाएं। इस दिन देवी कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाने से जीवन में सुख-समृद्धि की वर्षा होती है। साथ ही हर तरह के भय और नकारात्मकता से भी छुटकारा मिलता है। 💙

🕉️ मां कालरात्रि के शक्तिशाली मंत्र

  1. ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥
  2. ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं॥
  3. ॐ ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥
  4. ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके स्वाहा॥

📿 विशेष मंत्र
‘ॐ कालरात्र्यै नमः’
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’

🔱 बीज मंत्र
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः’

📖 स्तोत्र मंत्र
‘या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥’

📜 ध्यान श्लोक
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

🌺 मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खडग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली मां जिसे बचाबे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि मां तेरी जय॥ 🙏

जय मां कालरात्रि! इस महासप्तमी पर मां का आशीर्वाद आपके जीवन से हर भय और संकट दूर करे।

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