नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव में वृद्धि के बाद दिल्ली के निवासियों में रसोई गैस के घटते भंडार को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं, जिसके चलते राजधानी में अटल कैंटीनों में पहुंचने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।
घरों में द्रवित पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडर खत्म होने के कारण लोग रोजाना भोजन प्राप्त करने के लिए अटल कैंटीन जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप इन रियायती सुविधाओं पर अचानक निर्भरता बढ़ गई है। कैंटीनों के बाहर लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे कई बार खाद्य पदार्थ खत्म हो जाते हैं।
आश्रम की निवासी आभा शेखर ने कहा, ‘‘मंगलवार से मेरा परिवार दोपहर और रात के खाने के लिए यहीं (अटल कैंटीन में) आ रहा है। यह हमारे घर के पास है, इसलिए काम चल जाता है। वरना मेरे पास खाना बनाने का कोई और विकल्प नहीं है।’’
शेखर ने बताया कि वह घरेलू सहायिका का काम करती है और उनके पति निर्माण मजदूर हैं।
यह दंपति रोजाना सिलेंडर वितरकों के पास जा रहा है, लेकिन उसे अभी तक सिलेंडर नहीं मिल पाया है।
आश्रम में अटल कैंटीन के पास राशन की दुकान चलाने वाले हेमंत ने कहा कि उसने भी हाल के दिनों में अपने घर पर उपलब्ध गैस को बचाने के लिए कैंटीन में ही खाना शुरू कर दिया है।
हेमंत ने बताया कि उसने लगभग 20 दिन पहले अपना गैस सिलेंडर भरवाया था और यह शायद कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा। उसने कहा कि जब तक उसे दूसरा सिलेंडर नहीं मिल जाता, तब तक उसकी कैंटीन पर निर्भर रहने की योजना है, क्योंकि वहां का खाना किफायती है।
कैंटीन के एक कर्मचारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पिछले दो-तीन दिनों में सामान्य से अधिक लोग कैंटीन में आ रहे हैं और अचानक आई भीड़ के कारण कई बार भोजन की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘कल रात खाने के लिए लोगों की लाइन सड़क तक पहुंच गई थी। खाना खत्म हो गया और कुछ लोगों को बिना खाए ही वापस जाना पड़ा।’’
एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि सामान्यतः एक दिन में लगभग 200 से 250 लोग कैंटीन आते हैं। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह के आरंभ से यह संख्या बढ़कर 300 से अधिक हो गई है।
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के प्रधान निदेशक पी.के. झा ने कहा कि सिलेंडरों से संबंधित कोई समस्या नहीं है। उन्होंने अटल कैंटीनों या आश्रय गृहों में भोजन की कमी से इनकार किया।