नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) भारत ने चीन से सैकरिन के आयात पर लगाए गए प्रतिपूरक शुल्क से बचने के कथित प्रयासों की जांच शुरू की है। यह उत्पाद खाद्य, पेय और दवा सहित कई उद्योगों में इस्तेमाल होता है। एक आधिकारिक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है।
वाणिज्य मंत्रालय के तहत संचालित व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने स्वाति पेट्रो प्रोडक्ट्स और ब्लू जेट हेल्थकेयर के अनुरोध पर यह जांच शुरू की है।
आवेदकों का आरोप है कि चीन से आयातित सैकरिन पर लगाए गए मौजूदा प्रतिपूरक शुल्क से बचने के लिए इस उत्पाद को थाईलैंड के रास्ते भारत भेजा जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि थाईलैंड से निर्यात किया जा रहा सैकरिन वहां न बनकर चीन में बना हुआ है और केवल शुल्क से बचने के लिए थाईलैंड के जरिये भारत भेजा जा रहा है।
आवेदकों ने यह भी कहा है कि थाईलैंड में सैकरिन के वास्तविक विनिर्माण संयंत्र मौजूद नहीं हैं।
वित्त मंत्रालय ने 25 फरवरी, 2025 को चीन से आयातित सैकरिन पर प्रतिपूरक शुल्क लगाया था और यह शुल्क अभी भी प्रभावी है।
डीजीटीआर की जांच में अगर पाया जाता है कि शुल्क से बचने के लिए थाईलैंड के जरिये आयात किया जा रहा है, तो वह थाईलैंड से सैकरिन के आयात पर भी प्रतिपूरक शुल्क बढ़ाने या लागू करने की सिफारिश कर सकता है। हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय ही करेगा।