भारतीय कंपनियां एआई अपनाने में वैश्विक फर्मों से आगे, विशेषज्ञता में पीछे: डेलॉयट रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) भारतीय कंपनियां कृत्रिम मेधा (एआई) को बड़े पैमाने पर अपनाने के मामले में अपने वैश्विक समकक्षों से आगे निकल रही हैं। ज्यादातर संगठन अगले साल अपने एआई बजट में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

हालांकि, एआई को तेजी से अपनाने के बावजूद इसमें एक महत्वपूर्ण क्षमता अंतराल भी दिखाई देता है, क्योंकि भारत में वैश्विक औसत की तुलना में एआई विशेषज्ञता का स्तर काफी कम है।

वर्ष 2026 की ‘स्टेट ऑफ एआई इन द एंटरप्राइज’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियां परीक्षण के दौर से आगे बढ़ते हुए प्रमुख कार्यों में बड़े पैमाने पर एआई को अपना रही हैं।

डेलॉयट ने कहा, ‘‘बड़े पैमाने पर एआई का उपयोग उत्पाद विकास (62 प्रतिशत), रणनीति और संचालन (56 प्रतिशत), विपणन और बिक्री (55 प्रतिशत) और आपूर्ति श्रृंखला (48 प्रतिशत) में सबसे मजबूत है। इससे संकेत मिलता है कि एआई तेजी से उन कार्यों में शामिल हो रहा है जो विकास, दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को बढ़ावा देते हैं।’’

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘लगभग 40 प्रतिशत भारतीय उत्तरदाताओं ने महत्वपूर्ण या पूर्ण एआई उपयोग की जानकारी दी है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 28 प्रतिशत है।’’ रिपोर्ट में 200 से अधिक व्यापारिक और प्रौद्योगिकी दिग्गजों की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।

दूसरी ओर डेलॉयट ने पाया कि केवल 0-4 प्रतिशत भारतीय कंपनियों के पास उच्च स्तर की एआई विशेषज्ञता है, जो 2-8 प्रतिशत के वैश्विक औसत से काफी पीछे है।

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