बंधुत्व की कमी भारत के सामाजिक ताने-बाने और वैश्विक प्रतिष्ठा को कमजोर करती है: अंसारी

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नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) पूर्व उपराष्ट्रपति एम हामिद अंसारी ने बुधवार को कहा कि भारत ने पिछले 75 वर्षों में न्याय, स्वतंत्रता और समानता के क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन बंधुत्व के संवैधानिक आदर्श को आगे बढ़ाने में ‘‘पूरी तरह से विफल’’ रहा है। पूर्व उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि यह अंतर आंतरिक एकता और विदेश नीति दोनों को प्रभावित कर रहा है।

अंसारी, सलमान खुर्शीद और सलिल शेट्टी द्वारा संपादित पुस्तक ‘‘इंडियाज ट्रिस्ट विद द वर्ल्ड’’ के विमोचन के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “संविधान लिखते समय, प्रस्तावना में चार सिद्धांत निर्धारित किए गए थे – न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व। पिछले 75 वर्षों में, हम पहले तीन सिद्धांतों की ओर कुछ हद तक आगे बढ़े हैं, लेकिन बंधुत्व के क्षेत्र में हम पूरी तरह से विफल रहे हैं।”

अंसारी ने चेतावनी दी कि रोजमर्रा की जिंदगी में बंधुत्व को बढ़ावा दिए बिना, व्यापक सामाजिक और नीतिगत लक्ष्य ‘‘अधूरे’’ रह जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘न्याय महत्वपूर्ण है, समानता महत्वपूर्ण है, लेकिन बंधुत्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमें यही करना होगा।’’

भारत की वैश्विक छवि पर चिंता व्यक्त करते हुए अंसारी ने कहा कि यदि देश अपने मूलभूत मूल्यों को बनाए रखने में विफल रहता है तो वह अब दुनिया के लिए एक आदर्श होने का दावा नहीं कर सकता है।

इससे पहले पुस्तक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए खुर्शीद ने कहा कि लोग बदलती हुई विश्व व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं और साथ ही यह एक बड़ा सवाल है कि भारत की स्थिति क्या है।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पश्चिम एशिया में हुई अशांति के भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बात की और कहा कि 22 भारतीय जहाज अब भी होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं।

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