सेवानिवृत्त होने जा रहे सांसदों की सुविधाओं का ध्यान रखेगी सरकार : संसदीय कार्य मंत्री रीजीजू

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नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सेवानिवृत्त होने जा रहे सदस्यों को आश्वासन दिया कि सरकार इस बात का ध्यान रखेगी कि वे बाद में जब भी किसी काम से संसद आएं तो उन्हें कोई असुविधा नहीं हो।

रीजीजू ने बताया कि सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को विदाई देने के लिए सदन के नेता जे पी नड्डा आज सदन में नहीं आ पाये क्योंकि उनके किसी परिजन का निधन हो गया है।

उन्होंने सेवानिवृत्त सदस्यों को सरकार की तरफ से आश्वासन दिया कि वह जब भी यहां अपने किसी काम से आएंगे तो उन्हें कोई असुविधा नहीं हो, इसका ध्यान रखा जाएगा।

रीजीजू ने कहा कि किसी भी सदस्य को सेवानिवृत्ति के समय दुखी मन से नहीं जाना चाहिए किंतु ऐसे अवसर पर भारी मन से जाना, कोई बुरी बात नहीं है।

रीजीजू ने कहा कि उच्च सदन के कुल 59 सदस्य सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इनमें 36 सदस्य अप्रैल माह में सेवानिवृत्त हो जाएंगे, 22 सांसद जून में कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि एक सांसद जुलाई में सेवानिवृत्त होंगे जबकि एक सदस्य 16 मार्च को सेवानिवृत्त हो गये।

रीजीजू ने कहा कि उन्हें यह खबर मिली है कि इनमें से नौ सदस्य पुन:निर्वाचित होकर आने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों के लिए उपराष्ट्रपति एनक्लेव में जो विदाई समारोह आयोजित किया गया है उसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।

उच्च सदन से सेवानिवृत्त हो रहीं कांग्रेस की रजनी अशोकराव पाटिल ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि विधेयकों पर चर्चा के दौरान और संसदीय समितियों की बैठकों में उन्होंने हमेशा कुछ न कुछ सीखा।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पूर्व सभापति हामिद अंसारी, एम वेंकैया नायडू, जगदीप धनखड़ और वर्तमान सभापति सी पी राधाकृष्णन के कार्यकाल में इस सदन में काम किया, जिस पर उन्हें गर्व है।

तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि इस सदन के अनुभव उनकी अमूल्य पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि जब वह सदन में पहले दिन आए थे तब उन्हें यहां के कामकाज की जानकारी नहीं थी। ‘‘लेकिन यहां बहुत कुछ सीखने को मिला।’’

भारतीय जनता पार्टी के भुवनेश्वर कालिता ने कहा कि उन्हें उच्च सदन में जो अनुभव मिले हैं, वे उन्हें जीवन भर नहीं भुला सकते। उन्होंने कहा कि वह सदन से सेवानिवृत्त हो रहे हैं पर राजनीति में सक्रिय रहेंगे।

भाजपा के रामेश्वर तेली ने कहा कि उन्होंने जीवन भर यह नहीं सोचा कि उन्हें संसद में आने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनके संसदीय अनुभवों में तीन तलाक के विरूद्ध लाये गये विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को पारित किया जाना शामिल है।

इसी दल की किरण चौधरी ने कहा कि उनका कार्यकाल भले ही बहुत सीमित रहा किंतु उन्हें यहां काफी सीखने का मौका मिला और इन अनुभवों से काफी समृद्ध हुईं।

भाजपा के नरहरि अमीन ने उच्च सदन के सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को विदाई देते हुए अपनी बात गुजराती में रखी।

भाजपा के रामभाई मोकरिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अपनी पार्टी के कई नेताओं को इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि उन जैसे कार्यकर्ता को संसद में भेजने के लिए उपयुक्त पाया। उन्होंने कहा कि इस सदन में आने के बाद उन्होंने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली।

भाजपा के दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्यसभा में उनका कार्यकाल एक अनमोल अनुभव है। उन्होंने कहा कि वह इस बात को कभी भूल नहीं सकते कि कोरोना काल में सदस्यों ने सदन की कार्यवाही में भाग लेकर अपने दायित्वों को पूरा किया।

इसी पार्टी के रामचंद्र जांगड़ा ने कहा कि उन्होंने गाड़िया लुहार समुदाय के लोगों का मुद्दा उठाया जिस पर इस समुदाय के लोगों ने उनके घर आकर आभार जताया।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि विपक्ष का थोड़ा हंगामा तो ठीक है किंतु ज्यादा हंगामा ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष का सहयोग भी आवश्यक है।

भाजपा की रमिलाबेन बेचारभाई बारा ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल के कारण राजनीति में आयीं। उन्होंने कहा कि वह एक भी दिन उच्च सदन में न तो देर से आयी न ही उन्होंने एक भी दिन छुट्टी की।

भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी ने उनका इस सदन में सभी सदस्यों के साथ यादगार समय बीता।

भाजपा के महाराजा संजोआबा लेशंबा, राजेन्द्र गहलोत ने भी अपने अनुभवों को साझा किया।

इसी दौरान कांग्रेस के मुख्य सचेतक ने आसन पर बैठे उपसभापति हरिवंश से यह जानना चाहा कि जब सदन में इतने सारे सदस्यों को विदाई दी जा रही है और उनके लिए उपराष्ट्रपति एनक्लेव में समारोह आयोजित हो रहा है तो एक पूर्व सभापति के लिए ऐसा कार्यक्रम कब होगा?

उन्होंने हालांकि पूर्व सभापति का नाम नहीं लिया किंतु उनका संकेत जगदीप धनखड़ की ओर था जिन्होंने पिछले साल मानसून सत्र के दौरान सभापति के पद से इस्तीफा दे दिया था।

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