बाल कहानी- नाम की महिमा

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भाषणा गुप्ता
पिंकू जब भी स्कूल से घर लौटता तो पेटदर्द होने की बात करता। काफी दिनों से वह लगातार पेटदर्द से परेशान था। उसकी मम्मी को उसकी चिंता होने लगी।
उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने कहा, ’यह सब खानपान की गलत आदतों का नतीजा है।‘
मम्मी को हैरानी थी कि वे लंच में उसे हल्का व पौष्टिक भोजन ही देती हैं, फिर यह रोजाना का पेटदर्द क्यों?
मम्मी ने रोजाना पिंकू का टिफिन चेक करना शुरू कर दिया परंतु उसका टिफिन भी खाली होता था।
जब मम्मी कुछ पता नहीं लगा पाई तो उन्होंने इस बारे में पिंकू की टीचर से बात की। टीचर ने उनको विश्वास दिलवाया कि वे इस पर जरूर ध्यान देंगी।
अगले दिन टीचर ने लंच पीरियड में देखा कि पिंकू अपने सहपाठी राहुल को अपना लंच दे देता है और उसके बदले में उससे पैसे लेकर कैंटीन से चटपटी चीजें खाता है।
टीचर ने जब यह सब उसकी मम्मी को बताया तो वह हैरान रह गईं।  उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि पिंकू ऐसा भी करता है।
उन्होंने पिंकू को सुधारने के लिए एक तरकीब सोची।
अगले दिन जब पिंकू स्कूल जाने लगा तो उन्होंने टिफिन में उसका लंच ही नहीं रखा।
पिंकू रोजाना की तरह लंच पीरियड में राहुल के पास गया और उसे टिफिन देते हुए बोला, ’लाओ, राहुल, तुम्हारी मम्मी ने तुम्हें जो पैसे दिए हैं, वे मुझे दे दो।‘‘
राहुल ने उससे टिफिन लिया व उसे पैसे दे दिए। पैसे लेकर पिंटू कैंटीन की तरफ चला गया। राहुल ने जब टिफिन खोला तो यह खाली था।
उसने पिंकू को बताया तो वह कहने लगा, ’आज मम्मी खाना रखना भूल गई होंगी।‘
उस दिन राहुल तो भूखा रहा परंतु पिंकू ने कैंटीन से कुरकुरे व चिप्स लेकर खा लिए।
अगले दिन भी जब ऐसे ही हुआ तो राहुल ने उसे पैसे देने से मना कर दिया। मजबूरीवश पिंकू को भी भूखा रहना पड़ा।
जब उसने मम्मी से इसका कारण पूछा तो मम्मी ने कहा, ‘बेटा, तुम लंच खाते नहीं थे और राहुल से पैसे लेकर जो कुछ खाते हो, उससे ही तुम्हारे पेट में दर्द हुआ है। अगर तुम लंच खाओगे, तभी मैं टिफिन में रखूंगी।’ पिंकू सारी बात समझ गया व उसने निर्णय किया कि आगे से वह मम्मी का बना खाना ही खाएगा।

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