एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए एथनॉल को रसोई ईंधन के रूप में विकसित करने पर जोर

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नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) पेट्रोलियम उद्योग ने मंगलवार को उद्योग जगत के दिग्गजों से एथनॉल को भारतीय परिवारों के लिए एक स्वच्छ रसोई ईंधन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। उद्योग का मानना है कि इससे आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम करने और जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों को बल मिलेगा।

फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (एफआईपीआई) के निदेशक (डाउनस्ट्रीम) आर एस रवि ने ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह अपील की।

उन्होंने एथनॉल आधारित रसोई स्टोव पर जारी शोध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एलपीजी उपकरण अनुसंधान केंद्र (एलईआरसी) और विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में इस दिशा में काफी काम हो रहा है तथा इसके प्रारूप (प्रोटोटाइप) जल्द ही तैयार होने की संभावना है।

रवि ने इस संबंध में एआईडीए और उसके सदस्यों से दो प्रमुख मोर्चों पर सक्रिय सहयोग मांगा।

उन्होंने इन स्टोव के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विनिर्माताओं के साथ जुड़ने और सबसे महत्वपूर्ण रूप से सीधे घरों तक एथनॉल पहुंचाने के लिए एक व्यावहारिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर जोर दिया।

रवि ने स्पष्ट किया कि अभी तक उद्योग पेट्रोलियम कंपनियों को थोक में आपूर्ति कर रहा है, लेकिन अब इस मॉडल को बदलने और वितरण के प्रभावी स्वरूप पर विचार करने की आवश्यकता है। उनकी यह टिप्पणी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (ई-20) के सफल कार्यान्वयन की पृष्ठभूमि में आई है।

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