देखा गया है कि आबादी से दूर निर्जन स्थानों पर खाली पड़े मकानों और खण्डहरों में जाने से लोग घबराते हैं क्योंकि लोगों की मान्यता है कि ऐसे निर्जन खाली पड़े स्थानों को भूत-प्रेत, बुरी आत्माएँ अथवा शैतान अपना ठिकाना बना लेते हैं। कई बार खाली पड़े मकानों पर भी शैतान कि़स्म के लोग क़ब्ज़ा कर लेते हैं। यही स्थिति हमारे मन की भी है। खाली मन में भी शैतान घुस कर क़ब्ज़ा कर लेता है। प्रश्न उठता है कि मन खाली कैसे होता है और कौन है वह शैतान जो हमारे मन में घर कर जाता है?
मन क्या है? मन वह है जो मनन करे अथवा सोचे-विचारे। कहा गया है, संकल्पविकल्पात्मकं मनः अर्थात् मन संकल्प और विकल्प स्वरूप है। मन में हर पल असंख्य विचार आते और जाते हैं और उनमें परिवर्तन होता रहता है। मन अत्यंत चंचल है, कहीं एक स्थान पर टिकता नहीं, भागता रहता है। मन में जब कोई एक विचार आता है तो तत्क्षण उसके विपरीत विचार भी आ जाता है और इस प्रकार मन में विचारों का तांता लगा रहता है और उनमें द्वन्द्व भी चलता रहता है।
यदि आप व्यस्त रहते हैं तो आपका मन भी काम में लगा रहता है जिससे मन की चंचलता कम हो जाती लेकिन जैसे ही आप कार्य से पूरी तरह मुक्त हो जाते हैं मन फिर भटकना शुरू कर देता है और इस दौरान कहीं से भी मन में अनचाहे विचार आ धमकते हैं। यही अनचाहे, अनियंत्रित, अनुपयोगी नकारात्मक घातक विचार ही शैतान हैं।
कहने का तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार शैतान या शैतान रूपी लोग ख़ाली घरों पर क़ब्ज़ा कर लेते हैं उसी प्रकार नकारात्मक विचार रूपी शैतान खाली मन पर क़ब्ज़ा कर लेते हैं। ये हमारे नकारात्मक विचार ही होते हैं जिनके कारण मन में भय, निराशा, चिंता, तनाव, कुंठा व दबाव जैसे घातक मनोभाव पैदा हो जाते हैं और यही मनोभाव हमें बीमारियों से ग्रस्त कर देते हैं।
शैतान का कार्य होता है ग़लत दिशा में अग्रसर करना। हमारे नकारात्मक विचार शैतान का ही प्रतीक हैं और शैतान प्रतीक है बुराई का तथा नकारात्मक मनोभावों का। जीवन के हर क्षेत्रा में शैतान का मुक़ाबला ही तो करता है। अब अगली समस्या है कि नकारात्मक विचार रूपी शैतान से कैसे मुक्ति मिले? जिस प्रकार मकान की सुरक्षा का सबसे कारगर तरीक़ा है मकान को खाली मत छोड़ें, उसी प्रकार मन रूपी मकान की सुरक्षा का तरीक़ा भी यही है कि मन को खाली मत रहने दें । मन को अच्छे विचारों से ओतप्रोत रखें यानी मन में हमेशा शुभ विचार चक्कर लगाते रहें।
खाली मकान की सुरक्षा का एक तरीक़ा और भी है और वो यह है कि मकान किसी भले व्यक्ति को किराये पर उठवा दें । सुरक्षा की सुरक्षा और ऊपर से आमदनी भी। मन रूपी मकान में भी यही तरीक़ा अपनाया जाता है।
भले किरायेदार की तरह मन को भी भले अथवा उपयोगी विचारों के हवाले कर दें। सत्साहित्य और प्रेरणास्पद साहित्य का पठन-पाठन इसमें सहायक हो सकता है। मन में जब तक अच्छे विचार भरे रहेंगे तब तक बुरे विचार प्रवेश ही नहीं कर पाएँगे। दो परस्पर विरोधी बातें एक साथ घटित नहीं हो सकतीं।
जिस प्रकार किरायेदार का चुनाव कर सकते हैं उसी प्रकार विचारों का चुनाव भी संभव है। असंख्य विचारों में से अपने लिए अच्छे और उपयोगी विचारों को चुन लंे और इन्हीं सकारात्मक विचारों से मन को पूरी तरह आप्लावित कर लें। मन को भटकने न दें। कहीं न कहीं व्यस्त रखें । जब मन को व्यस्त रखना है तो उसे सकारात्मक सोच की तरफ प्रेरित करें। अतः नकारात्मकता से बचने के लिए सकारात्मकता का चयन कर उसे मन के हवाले कर देना ही एकमात्र उपाय है जिससे मन में शैतान को घर करने से रोका जा सकता है।
