काठमांडू, 30 मार्च (भाषा) नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहे। इस बीच, प्राधिकारियों ने धन शोधन को लेकर तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ जांच तेज कर दी है।
ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को पिछले साल सितंबर में ‘जेन-जेड’ समूह के नेतृत्व में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने में उनकी भूमिका के आरोप में गत शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया था। इन विरोध-प्रदर्शनों के दौरान लगभग दो दर्जन युवाओं समेत 76 लोग मारे गए थे।
बालेंद्र शाह के नेतृत्व में हाल ही में गठित नयी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ‘जेन-जेड’ विरोध-प्रदर्शनों की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट लागू करने का फैसला लिया था, जिसके बाद ओली और लेखक को गिरफ्तार कर लिया गया।
ओली नीत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) और उसके सहयोगी संगठनों एवं छात्र इकाइयों के सैकड़ों कार्यकर्ता सोमवार सुबह नया बनेश्वर क्षेत्र में इकट्ठा हुए। उन्होंने हाथों में तख्तियां थाम रखी थीं, जिन पर “केपी ओली को तुरंत रिहा करो” और “बदले की राजनीति बंद करो” जैसे नारे लिखे हुए थे।
सोमवार को हुए विरोध-प्रदर्शन सीपीएन-यूएमएल की ओर से शनिवार और रविवार को किए गए प्रदर्शन के मुकाबले शांतिपूर्ण रहे। रविवार को दंगा पुलिस के साथ झड़प में सीपीएन-यूएमएल के एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता घायल हो गए थे।
इस बीच, नेपाल के धन शोधन जांच विभाग (डीएमएलआई) और पुलिस ने पूर्व मंत्री दीपक खड्का की गिरफ्तारी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ के खिलाफ जांच तेज कर दी है।
‘द काठमांडू पोस्ट’ की खबर के मुताबिक, मामले की विस्तृत जांच शुरू करने से पहले विभाग ने लगभग छह महीने तक प्रारंभिक जांच की थी।
ऊर्जा मंत्री रह चुके खड्का को धन शोधन से जुड़े एक मामले के सिलसिले में पिछले रविवार को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायत के बाद सोमवार को महाराजगंज स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
खड्का पर ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान परियोजनाओं के लिए लाइसेंस एवं अनुबंध दिलाने में मदद के बदले वित्तीय लाभ हासिल करने का आरोप है।
पिछले साल ‘जेन जेड’ के विरोध-प्रदर्शन के दौरान ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे, जिनमें खड्का, देउबा और प्रचंड के आवास पर जले हुए नोट के टुकड़े दिख रहे थे। बाद में फॉरेंसिक जांच के जरिये इन तस्वीरों-वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि हुई थी।