दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

0
sder43eer5t4

नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के एक मामले में एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका यह देखते हुए खारिज कर दी कि तकनीक का उपयोग करके भोले-भाले पीड़ितों से पैसे वसूलने के मामले देश भर में तेजी से बढ़ रहे हैं।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि आरोपी साइबर धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में कथित तौर पर शामिल था और पूरी कार्यप्रणाली तथा बड़ी साजिश का खुलासा करने के लिए उससे हिरासत में पूछताछ करना बहुत जरूरी है।

न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि उच्चतम न्यायालय ने जाली न्यायिक दस्तावेजों के आधार पर की गई ‘‘डिजिटल अरेस्ट’’ के मुद्दे का स्वतः संज्ञान लिया है और वर्तमान प्राथमिकी में पीड़ित को उस मामले में हस्तक्षेपकर्ता के रूप में शीर्ष न्यायालय की सहायता करने की अनुमति दी गई थी।

अदालत ने 11 मार्च को पारित आदेश में कहा, ‘‘इस प्रकार, वर्तमान मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए, इस न्यायालय की राय है कि आवेदक के खिलाफ आरोप साइबर धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले से संबंधित हैं जिसमें तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ की कार्यप्रणाली शामिल है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इस तरह के अपराध तकनीकी साधनों के माध्यम से भोले-भाले पीड़ितों को धोखा देकर उनसे पैसे वसूलने के लिए किए जाते हैं और जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने देखा है, देश भर में ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।’’

अदालत ने निष्कर्ष निकाला, ‘‘इस अदालत का मानना ​​है कि इस स्तर पर अग्रिम जमानत देना जांच में बाधा उत्पन्न कर सकता है, खासकर तब जब पूरी कार्यप्रणाली और बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए आवेदक से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।’’

ग्रेटर कैलाश-एक की निवासी शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 15 मार्च 2025 को उन्हें एक ऐसे व्यक्ति का व्हाट्सएप कॉल आया जिसने खुद को निगरानी अधिकारी बताया और उनसे कहा कि उनके बैंक खाते निगरानी में हैं।

बताया जा रहा है कि इस कॉल पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक अधिकारी मौजूद थी और धन शोधन मामले में उसकी संलिप्तता के कारण उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के तहत रखा गया था और उच्चतम न्यायालय का एक कथित आदेश भी साझा किया गया था।

शिकायत में कहा गया है कि धोखेबाजों ने शिकायतकर्ता को 18 मार्च 2025 को उसके एसबीआई खाते से दूसरे बैंक खाते में 30 लाख रुपये अंतरित करने के लिए मजबूर किया गया और उसके द्वारा एक अन्य खाते में 80 लाख रुपये अंतरित करवाए गए।

उन्होंने 23 मार्च 2025 को साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *