पश्चिम एशिया तनाव से सीजीडी बिक्री मात्रा में आठ से 10 प्रतिशत की कटौती के आसार:क्रिसिल

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नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी रहने के बीच, भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी (सेवानिवृत्त) ने कहा है कि भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण सीख यह है कि उसे अधिक अस्त्र प्रणालियों, रडारों और अन्य अभियानगत क्षमताओं के साथ एक ‘‘अत्यंत मजबूत हवाई रक्षा’’ का निर्माण करने की आवश्यकता है।

बृहस्पतिवार को यहां एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पीटीआई-भाषा से बातचीत के दौरान चौधरी ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया संघर्ष में ड्रोन के उपयोग का जिक्र किया और कहा कि वे भविष्य के किसी भी संघर्ष में बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि अभी ‘‘हमें अपना सारा भरोसा केवल ड्रोन पर नहीं रखना चाहिए’’।

पूर्व वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हां, वे मौजूदा प्रयासों में सहायक होंगे, लेकिन हम युद्ध जीतने के लिए पूरी तरह से ड्रोन पर निर्भर नहीं रह सकते।’’

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमलों की शुरुआत की थी। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी वाले कई खाड़ी देशों पर हमला किया, जिससे वैश्विक विमानन संचालन और तेल की कीमतों पर असर पड़ा तथा गंभीर ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है।

भारत और पड़ोसी देशों के रक्षा एवं रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ बुधवार से शुरू हुए तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन बेंगलुरु आधारित थिंक-टैंक सिनर्जिया द्वारा मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जा रहा है।

चौधरी ने बृहस्पतिवार को ‘भारत की बहु-क्षेत्रीय हवाई रीढ़’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में मुख्य भाषण दिया।

कार्यक्रम से इतर यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें पश्चिम एशिया संघर्ष के जल्द ही समाप्त होने की कोई उम्मीद है, उन्होंने कहा, ‘‘आपका अनुमान मेरे अनुमान जितना ही अच्छा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि मौजूदा संघर्ष से सबसे पहला सबक यही मिलता है कि देश के लिए एक अत्यंत मजबूत हवाई रक्षा प्रणाली का होना आवश्यक है। क्योंकि हमारे पास जो कुछ है, वह शायद इस तरह के संघर्ष में पर्याप्त न हो।’’

चौधरी ने पीटीआई-वीडियो से कहा, ‘‘इसलिए, इसे मजबूत करने के लिए हमें अधिक अस्त्र प्रणालियों, अधिक रडारों, सभी प्रणालियों के अधिक एकीकरण, साइबर क्षमताओं के एकीकरण की आवश्यकता है। अतः देश में एक मजबूत हवाई रक्षा नेटवर्क का होना सर्वथा सबसे बड़ी आवश्यकता है।’’

सम्मेलन के दो दिनों के दौरान आयोजित कई सत्रों में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष चर्चा का प्रमुख विषय बना रहा।

एकीकरण और संयुक्तता के संदर्भ में प्रमुख क्षेत्रों के बारे में पूछे जाने पर, पूर्व भारतीय वायुसेना प्रमुख ने अपने संबोधन से पहले कहा कि एक अत्यंत मजबूत नेटवर्क का निर्माण करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘और इसके लिए बहुत काम करना पड़ेगा… इतनी विविध प्रणालियों को एक ही ग्रिड पर लाना होगा। इसलिए मुझे लगता है कि सभी को एक नेटवर्क पर लाने का यही पहला कदम है ताकि किसी भी बहु-क्षेत्रीय अभियानगत परिदृश्य में, हमें अलग-अलग सेवाओं की क्षमताओं को नहीं देखना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति की क्षमताओं का उपयोग दुश्मन पर करना चाहिए।’’

चौधरी ने कहा कि भारतीय सेना ने 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन के बीच लंबे संघर्ष से कई सबक सीखे हैं, और इसमें ड्रोन का युद्धक उपयोग अनेक शोधकर्ताओं तथा विचारकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘यूक्रेन में ड्रोन जैसे कम लागत वाले प्लेटफॉर्म के उपयोग से कार्रवाई करने में सक्षम होने का तत्व उजागर हुआ है, तथा यहां (पश्चिम एशिया संघर्ष में) भी, और ऐसे ड्रोन के खिलाफ रक्षा पर अधिक खर्च करने की आवश्यकता भी सामने आई है।’’

पूर्व वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित संघर्ष में ड्रोन ‘‘बहुत बड़ी भूमिका’’ निभाने जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन फिलहाल हमें अपना सारा भरोसा सिर्फ ड्रोन पर नहीं रखना चाहिए। हां, वे मौजूदा प्रयासों में सहायक होंगे, लेकिन भविष्य में युद्ध जीतने के लिए हम पूरी तरह से ड्रोन पर निर्भर नहीं रह सकते।’’

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