नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और सरकार की विभिन्न नीतियों के विरोध में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मंगलवार को रामलीला मैदान में ‘जन आक्रोश रैली’ की जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए।
इस रैली में शामिल लोगों ने तख्तियां ले रखी थीं जिनमें आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, रसोई गैस और ईंधन की कमी सहित अन्य मुद्दों का जिक्र था।
इस दौरान माकपा के महासचिव एम.ए. बेबी ने रैली को संबोधित किया।
उन्होंने कहा, “चुनाव महत्वपूर्ण हैं लेकिन आम लोगों के मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। हम उनके समाधान के लिए लड़ना जारी रखेंगे।”
केंद्र पर निशाना साधते हुए माकपा नेता ने कहा, “केंद्र की नीतियां लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं।”
वामपंथ की प्रासंगिकता पर उन्होंने कहा, “अपने भाषणों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अक्सर कहते हैं कि भारत से लाल झंडा (वामपंथी झंडा) गायब हो गया है और यह केवल केरल में बचा है। वे कहते हैं कि जल्द ही इसे वहां से भी खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन मैं इस विमर्श को चुनौती देना चाहता हूं।”
उन्होंने कहा, “लाल झंडा ऐसी चीज नहीं है जिसे मिटाया जा सके। यह लोगों के संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। जहां-जहां लोग खड़े होंगे, वहां-वहां लाल झंडा लहराएगा।”
उन्होंने कहा, “रसोई गैस और ईंधन सहित आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, गैस सिलेंडर की कमी और भोजन के बढ़ते दाम पूरे भारत में आजीविका को प्रभावित कर रहे हैं।”
माकपा ने चार श्रम संहिताओं की अधिसूचना को वापस लेने और हाल ही में लागू ‘विकसित गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम को रद्द करने की भी मांग की।
वामपंथी दल ने यह भी कहा कि बिजली अधिनियम में संशोधन नहीं किया जाना चाहिए और बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण नहीं होना चाहिए। इसने बीज अधिनियम में संशोधन का भी विरोध किया।
यह रैली जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड सहित कई राज्यों में 27 फरवरी से 20 मार्च के बीच आयोजित 33 ‘जन आक्रोश जत्थों’ के बाद की गई।