नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को मंगलवार को एक बड़ा झटका लगा जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनके और उनके परिवार से जुड़े ‘‘जमीन के बदले नौकरी’’ मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने पूर्व रेल मंत्री एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री यादव की याचिका खारिज कर दी, जिसमें 2022, 2023 और 2024 में दायर तीन आरोपपत्रों और बाद के संज्ञान लेने के आदेशों को रद्द करने का अनुरोध भी किया गया था।
न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा, “याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”
फैसले की विस्तृत प्रति की प्रतीक्षा है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘‘जमीन के बदले नौकरी’’ का यह कथित मामला लालू प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल (2004 से 2009) के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ‘ग्रुप डी’ नियुक्तियों से संबंधित है।
अधिकारियों के अनुसार ये नियुक्तियां भर्ती किए गए लोगों द्वारा राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर कथित तौर पर उपहार स्वरूप दी गई या हस्तांतरित की गई भूमि के बदले की गई थीं।
यादव ने दलील दी थी कि इस मामले में जांच, प्राथमिकी, जांच की प्रक्रिया और बाद में दाखिल आरोपपत्र कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं, क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी नहीं ली थी।
यह मामला 18 मई, 2022 को यादव और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था।
लालू प्रसाद यादव (77) और अन्य लोग फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।