ईंधन कर ढांचे में बदलाव के बाद रिलायंस एसईजेड के निर्यात पर शुल्क को लेकर असमंजस : विश्लेषक

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नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) भारत द्वारा ईंधन कर ढांचे में बड़े बदलाव के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज की एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) रिफाइनरी से डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर को लेकर असमंजस की स्थिति कायम है। विश्लेषकों ने यह बात कही है।

गत 26 मार्च से लागू इस संशोधित रूपरेखा के तहत भारत ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया है, जबकि पेट्रोल को इससे छूट दी गई है। इसके साथ ही सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है।

ब्रिटेन की इन्वेस्टेक ने एक नोट में कहा कि यह अभी साफ नहीं है कि रिलायंस की एसईजेड रिफाइनरी से निर्यात, जिसका भारत के रिफाइनिंग उत्पाद निर्यात में बड़ा हिस्सा है, को छूट मिलती रहेगी या नहीं। वर्ष 2022 की अप्रत्याशित लाभ कर प्रणाली के तहत यह छूट दी जा रही थी।

रिलायंस के पास गुजरात के जामनगर में दो रिफाइनरी का स्वामित्व है। इनमें से एक 3.3 करोड़ टन सालाना क्षमता की रिफाइनरी घरेलू बाजार की जरूरत को पूरा करती है, जबकि एक अन्य 3.52 करोड़ टन क्षमता की रिफाइनरी सिर्फ निर्यात वाली एसईजेड इकाई है।

अगर एसईजेड निर्यात पर छूट कायम रहती है, तो रिलायंस के रिफाइनिंग मार्जिन नए शुल्क से काफी हद तक सुरक्षित रहेंगे, जिससे उसकी निर्यात आधारित परिचालन क्षमता की प्रतिस्पर्धी क्षमता बनी रहेगी। इसके उलट, निर्यात शुल्क के दायरे में आने से डीजल और एटीएफ के निर्यात पर मार्जिन में काफी कमी आएगी।

सिटी रिसर्च ने एक अलग नोट में कहा कि शुल्क में बदलाव पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को राहत देने वाला है, जबकि इससे रिलायंस के लिए रिफाइनिंग में बढ़ोतरी की संभावना सीमित हो जाती है।

सिटी ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के अलावा, आगे चलकर अप्रैल में होने वाले पांच राज्यों के चुनावों के बाद ईंधन की खुदरा कीमतों पर नजर रखने की जरूरत है।

सिटी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि इससे पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए कुल विपणन नुकसान पेट्रोल और डीजल पर 35-40 रुपये प्रति लीटर से घटकर 19-23 रुपये प्रति लीटर रह जाएगा।

सिटी ने कहा कि निर्यात कर डीजल पर 36 डॉलर प्रति बैरल और जेट ईंधन पर 50 डॉलर प्रति बैरल के बराबर हैं।

सिटी के मुताबिक, ‘‘वित्त वर्ष 2024-25 में रिलायंस का 75 प्रतिशत डीजल उत्पादन और 35 प्रतिशत जेट ईंधन उत्पादन उसकी एसईजेड रिफाइनरी से हुआ था, और हमारा मानना ​​है कि 2022 के उदाहरण के आधार पर, इसे इस कर से छूट मिल सकती है।’’

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