राज्यसभा में सोमवार को सीएपीएफ से संबंधित विधेयक पेश करेंगे अमित शाह

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नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश करेंगे जिसका उद्देश्य सीएपीएफ अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति और पदोन्नति को विनियमित करना है। राज्यसभा द्वारा जारी कार्यसूची में यह जानकारी दी गई है।

सभी सीएपीएफ -केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) – अपने-अपने अधिनियमों द्वारा संचालित होते हैं।

इन अधिनियमों के तहत बने नियम सीएपीएफ में समूह ‘ए’ सामान्य ड्यूटी अधिकारियों तथा अन्य अधिकारियों और कर्मियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों को नियंत्रित करते हैं।

सूत्रों के अनुसार, कार्यगत और परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के विस्तार तथा समय के साथ विकसित हुए प्रत्येक सीएपीएफ के विशिष्ट संगठनात्मक ढांचे के कारण इस कानून की आवश्यकता पड़ी।

उन्होंने कहा कि सीएपीएफ को नियंत्रित करने के लिए कोई एक कानून नहीं होने के कारण नियामक ढांचा बिखरे हुए तरीके से विकसित हुआ जिसके परिणामस्वरूप सेवा संबंधी मामलों पर मुकदमेबाजी होती है और कुछ कार्यात्मक एवं प्रशासनिक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।

सदन की ओर से जारी कार्यसूची के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में समूह ‘ए’ सामान्य ड्यूटी अधिकारियों तथा अन्य अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले सामान्य नियमों, इन बलों से संबंधित अन्य नियमों तथा उनसे जुड़े या उनके आनुषंगिक मामलों को विनियमित करना है।

सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित कानून इन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में नियुक्त समूह ‘ए’ सामान्य ड्यूटी अधिकारियों तथा अन्य अधिकारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करेगा।

उन्होंने कहा कि इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महानिरीक्षक और उससे ऊपर के पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की नियुक्ति के लिए महानिरीक्षक रैंक में 50 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाएं और अतिरिक्त महानिदेशक रैंक के कम से कम 67 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाएं।

सूत्रों ने कहा कि विधेयक के अनुसार विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के पद केवल प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे।

यह प्रस्तावित कानून ऐसे समय आया है, जब उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष अक्टूबर में केंद्र की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उसने 2025 के एक फैसले पर पुनर्विचार किए जाने का अनुरोध किया था। इस फैसले के तहत भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में प्रतिनियुक्ति कम करने और छह महीने में कैडर समीक्षा करने का निर्देश दिया गया था।

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखना है।

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