नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा क्षेत्र में पैदा हुए दबाव के बीच भारतीय कोयला बाजार में मांग और कीमतों में तेजी देखी जा रही है। एमजंक्शन सर्विसेज ने बृहस्पतिवार को कहा कि हालांकि कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा के जरिये बिजली क्षेत्र में कोई दिक्कत नहीं है।
टाटा स्टील और सेल के संयुक्त उद्यम एमजंक्शन के अनुसार, कोयला नीलामी के शुरुआती संकेत मांग और कीमतों में बढ़त दर्शा रहे हैं। हालांकि, यह बदलाव बहुत तीव्र न होकर एक नियंत्रित दायरे में है।
एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक विनय वर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भारत के कोयला नीलामी बाजार में मांग-आपूर्ति के समीकरणों में सख्ती और कीमतों के मजबूत होने के लक्षण दिख रहे हैं, हालांकि यह रुझान अभी धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
फरवरी में कोयले की बोलियां तय कीमतों से लगभग 35 प्रतिशत अधिक रहीं। इससे पता चलता है कि खरीदार अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए बड़ी अतिरिक्त राशि देने को तैयार हैं, जो आमतौर पर बाजार में कोयले की तत्काल कमी और भारी मांग का संकेत होता है।
यह दबाव कई कारणों से बढ़ रहा है, जिनमें गैस की आपूर्ति में बाधा आने से उद्योगों का कोयले की ओर झुकना और गर्मियों के लिए बिजली घरों द्वारा स्टॉक जमा करना शामिल है। साथ ही विदेशों से होने वाले आयात में दिक्कतों के कारण घरेलू कोयले पर निर्भरता बढ़ गई है।
वर्मा ने कहा कि भारत इस समय विदेशी तनाव के कारण ऊर्जा क्षेत्र में दबाव झेल रहा है। इसका असर उन औद्योगिक इलाकों में दिख रहा है जहां ईंधन की कमी और सीएनजी व रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति में बाधा आ रही है।
उन्होंने कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी के लिए विदेशों पर निर्भरता के कारण देश पर बाहरी झटकों का असर पड़ता है।
हालांकि, भारत का बिजली क्षेत्र काफी हद तक सुरक्षित है। बीते वर्षों में सही नीतियों के कारण गैस पर निर्भरता कम हुई है और अब कोयला व नवीकरणीय ऊर्जा इसकी मुख्य ताकत हैं।
वर्तमान माहौल में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोयला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हालांकि, बिजली क्षेत्र से इतर खाद और रसायन जैसे उद्योगों में गैस की जगह पूरी तरह कोयले का इस्तेमाल शुरू होने में अभी समय लगेगा।