अजित पवार के निधन के बाद प्रफुल्ल पटेल, तटकरे ने आयोग को पत्र लिखा था: रोहित पवार

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मुंबई, 25 मार्च (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) विधायक रोहित पवार ने बुधवार को आरोप लगाया कि राकांपा नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर एक “पूर्व नियोजित योजना” के तहत पार्टी के संविधान में बदलाव होने का झूठा दावा किया था जिसका उद्देश्य पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पटेल को व्यापक शक्तियां प्रदान करना था।

रोहित पवार ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बाद में निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर कहा कि उनके पति अजित पवार के निधन के बाद और उनके राकांपा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के समय के दौरान ऐसे किसी भी पत्राचार को नजरअंदाज किया जाए।

तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख अजित पवार की 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती हवाई पट्टी के पास एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के चार दिन बाद, 26 फरवरी को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और 26 फरवरी को उन्हें राकांपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।

रोहित पवार ने आरोप लगाया, ‘‘अजित पवार की मृत्यु के महज 18 दिनों के भीतर, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे (दोनों राकांपा सांसद) और बृजमोहन श्रीवास्तव ने 16 फरवरी को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर झूठा दावा किया कि पार्टी के संविधान में संशोधन किया गया है और मांग की कि सभी शक्तियां कार्यकारी अध्यक्ष, जो कि प्रफुल्ल पटेल थे, को सौंप दी जाएं।”

उन्होंने दावा किया, “सुनेत्रा पवार और उनके बड़े बेटे पार्थ पवार, दोनों को ही इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद, सुनेत्रा पवार को इस बारे में पता चला और उन्होंने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि 28 जनवरी से उनके कार्यभार संभालने के बीच हुए किसी भी पत्राचार पर विचार न किया जाए।’’

विधायक ने 10 मार्च और 26 फरवरी की तारीख वाले दस्तावेजों का हवाला दिया, जिन पर कथित तौर पर पटेल और तटकरे के हस्ताक्षर हैं और जिन्हें निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत किया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन दस्तावेजों में कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, सभी अधिकार राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पास होंगे और सभी निर्णय उन्हीं द्वारा लिए जाएंगे।

उन्होंने दावा किया, “इस पत्र ने प्रभावी रूप से सभी शक्तियां कार्यकारी अध्यक्ष के पास केंद्रित कर दीं।” उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार ने बाद में निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर कहा कि जब तक वह औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार ग्रहण नहीं कर लेतीं, तब तक ऐसे किसी भी अंतरिम पत्र व्यवहार को नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

रोहित पवार ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के उन बयानों को “संदिग्ध” बताया, जिसमें उन्होंने पहले कहा था कि प्रफुल्ल पटेल पार्टी अध्यक्ष बन गए हैं और बाद में कहा कि यह गलत जानकारी पर आधारित था। पवार ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं के बीच राकांपा पर नियंत्रण हासिल करने की “सोची-समझी योजना” थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पटेल और तटकरे के साथ-साथ कुछ भाजपा नेताओं ने अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार द्वारा प्रस्तावित संवाददाता सम्मेलन को रोकने के लिए दबाव डाला।

उन्होंने यह भी दावा किया कि वीएसआर कंपनी को “बचाने” के प्रयास जारी हैं, जिसने 28 जनवरी को अजित पवार और चार अन्य लोगों के साथ दुर्घटनाग्रस्त हुए लीयरजेट 45 विमान का संचालन किया था और दुर्घटना के बाद भी कंपनी को सरकार से 80 से 90 करोड़ रुपये (उसकी सेवाओं के लिए भुगतान) प्राप्त हुए।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए रोहित पवार ने कहा कि उन्हें सलाह दी गई थी कि वे अजित पवार के विमान दुर्घटना से संबंधित अपनी शिकायत उस राज्य में ले जाएं जहां उन्हें न्याय मिल सके, जिसके बाद कर्नाटक के बेंगलुरु में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई।

पुलिस किसी अपराध के अपने अधिकार क्षेत्र में न होने पर ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज कर सकती है और उसे उचित पुलिस थाने को स्थानांतरित कर सकती है।

किसी का नाम लिए बिना, रोहित पवार ने यह भी दावा किया कि विधानसभा सत्र के दौरान अजित पवार की दुर्घटना का मुद्दा नहीं उठाने के निर्देश जारी किए गए थे जिसके परिणामस्वरूप अधिकांश विधायक चुप रहे।

आपराधिक जांच की मांग करते हुए, विधायक ने सवाल उठाया कि क्या कथित पत्रों से लेकर पार्टी को नियंत्रित करने के प्रयासों तक का पूरा मामला एक बड़ी साजिश का हिस्सा था?

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अजित पवार की मृत्यु से पहले उनके आवास के बाहर “काला जादू” या संदिग्ध अनुष्ठान करने के प्रयास किए गए थे, जिसमें संभवतः नासिक के एक स्वयंभू बाबा का हाथ था।

उन्होंने सवाल किया, “क्या 28 जनवरी की घटना वास्तव में एक दुर्घटना थी या कुछ और अधिक गंभीर?” उन्होंने कहा कि इस मामले में चर्चा और जांच जारी है।

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