नालंदा विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार गौरव पुनर्स्थापित करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक:मुर्मु

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राजगीर, 31 मार्च (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को नालंदा विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं और कहा कि इस संस्थान से शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को मानवता की ‘‘साझा विरासत’’ प्राप्त होती है।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यहां से स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को दो चीजें मिलती हैं—डिग्री और विरासत। डिग्री जहां उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, वहीं उन्हें मानवता की साझा विरासत भी मिलती है।’’

उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी हैं, जो 30 से अधिक देशों से आए हैं।

राष्ट्रपति ने समारोह से पहले पौधारोपण अभियान में भी हिस्सा लिया और विश्वविद्यालय की ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।

‘नेट जीरो’ उत्सर्जन का मतलब है कि जो जितना कार्बन उत्सर्जन करता है, उतना ही कार्बन खत्म करने की व्यवस्था भी करे। ‘नेट जीरो’ का मतलब यह नहीं है कि कार्बन का उत्सर्जन शून्य हो जाएगा।

मुर्मू ने कहा, ‘‘यह परिसर ‘नेट-जीरो’ कैंपस बनने की दिशा में स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उच्च शिक्षण संस्थानों को उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेतृत्व करना चाहिए।’’

राष्ट्रपति ने अपने दौरे की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में बने ‘विश्व मित्रालय’ भवन के उद्घाटन से की। यह अत्याधुनिक भवन लगभग दो हजार लोगों की क्षमता वाला है और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राष्ट्रपति नालंदा विश्वविद्यालय की ‘विजिटर’ भी हैं।

उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके गौरवशाली विरासत को आधुनिक स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

यहां विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय करीब आठ सदियों तक ज्ञान का महान केंद्र रहा और उसका पतन न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ी क्षति था।

उन्होंने कहा, “इसका पुनरुद्धार विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत को आधुनिक परिवेश में फिर से स्थापित करने की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे समय में जब दुनिया कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है और करुणामय, स्वतंत्र तथा आलोचनात्मक सोच की आवश्यकता पहले से अधिक है, तब नालंदा विश्वविद्यालय एक अग्रणी वैश्विक शैक्षणिक संस्थान के रूप में उभरेगा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति का लाभ उस समाज तक भी पहुंचना चाहिए जहां यह स्थापित है। राष्ट्रपति ने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से जुड़ने के लिए विश्वविद्यालय की सामुदायिक पहल की सराहना की।

स्नातकों को डिग्री प्रदान करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “यहां से स्नातक होने वाले छात्रों को दो चीजें मिलती हैं—एक डिग्री और एक विरासत। डिग्री उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, जबकि यहां मिलने वाली मानवता की विरासत साझा है।”

राष्ट्रपति ने नालंदा विश्वविद्यालय के 36 छात्रों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष स्नातक होने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक 30 से अधिक देशों से हैं।

उन्होंने कहा, “आज का समारोह इस वचन की पुनर्पुष्टि है कि ज्ञान कायम रहेगा, संवाद जारी रहेगा और शिक्षा मानवता की सेवा करती रहेगी।”

महावीर जयंती के अवसर का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “भगवान महावीर और बुद्ध ने इसी बिहार क्षेत्र से पूरी मानवता को अहिंसा, करुणा और प्रेम का संदेश दिया।”

उन्होंने कहा कि बौद्ध चिंतन के इतिहास के कुछ महानतम मस्तिष्क नालंदा में रहे और कार्यरत थे।

उन्होंने कहा कि करीब आठ सदियों तक प्राचीन नालंदा एशिया में बौद्ध विद्वत्ता का बौद्धिक केंद्र रहा और विश्वास जताया कि नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध अध्ययन का अग्रणी वैश्विक केंद्र बन सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय को इस क्षेत्र में दृढ़ता, गहराई और खुलेपन के साथ निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा को अपनी गौरवशाली परंपरा को पुनः प्राप्त करने के लिए जिज्ञासा, संवाद और समन्वय की भावना को आत्मसात करना होगा। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपराएं कठोर सीमाओं में बंधी नहीं थीं, बल्कि वे जिज्ञासा, संवाद और समन्वय को बढ़ावा देती थीं तथा नालंदा को एक बार फिर विभिन्न विषयों और संस्कृतियों के ज्ञान को साथ लाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह विकास राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत समग्र, बहु-विषयक और मूल्य-आधारित शिक्षा पर सरकार के नए जोर के अनुरूप होगा।

उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासा की आदत विकसित करने, ज्ञान को सेवा से जोड़ने और अपने पूर्व विद्यार्थियों से जुड़े रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “आप इस संस्थान के राजदूत हैं।”

राष्ट्रपति ने नालंदा विश्वविद्यालय के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में नालंदा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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