क्यों छिपाती हैं महिलाएं अपनी उम्र

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महिलाओं के विषय में यह एक आम धारणा है कि वे अपनी उम्र छिपाती हैं। इसी कारण किसी भी वजह से महिला की उम्र के बारे में पूछताछ करना असभ्यता माना जाता है। इस संबंध में अधिकांश महिलाएं सच बोलने के लिए तैयार नहीं होती बल्कि वे सच बोलने की अपेक्षा नाटकीयता से इस प्रश्न पर टालमटोल का रूख अपनाती हैं।
बचपन में हमारे पड़ोस में एक महिला रहती थी जिन्हें सारा मुहल्ला ’बड़ी भाभी जी‘ कहकर पुकारता था। वे अपनी उम्र 30-35 के बीच ही बताती थी। मैंने लगभग बारह वर्षों तक यह देखा कि इससे अधिक आयु पर वह कभी नहीं पहुंची।
महिलाओं की इस आदत पर बेशुमार चुटकुले सुनने को मिलते हैं। जिनमें से एक यह भी है कि कोई महिला अपनी आयु जितने वर्ष कम बताती है, उतने साल वह सामने वाली औरत की उम्र में जोड़  देती है।
क्या उम्र सचमुच इतना अधिक महत्व रखती है कि इसकी वजह से किसी व्यक्ति के दिल में हमारे प्रति भावों और विचारों में परिवर्तन आ जाए? क्या उम्र छिपाने से महिलाओं के व्यक्तित्व और आकर्षण में कुछ वृद्धि हो जाती है।
रीता रस्तोगी एक गृहिणी हैं। वह इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं हैं कि केवल महिलाएं ही उम्र छिपाती हैं। उनका कहना है कि वे पुरूष, जो बालों में खिजाब लगाते हैं, प्लास्टिक सर्जरी द्वारा चेहरे की झुर्रियां मिटवाते हैं तथा महिलाओं के आग्रह पर अपनी क्षमता से अधिक कार्य कर देते हैं, उनके दिल में भी तो यही ख्याल होता है कि वे वास्तविक आयु की तुलना में कुछ अधिक युवा नजर आएं।
वास्तविकता यह है कि हम सभी अपनी बढ़ती आयु के प्रति संवेदनशील होते हैं। जब हमें अपने सिर पर पहली बार सफेद बाल नजर आता है, तब स्वाभाविक रूप से हमारे हाथ उसे उखाड़ने के लिए बढ़ जाते हैं। जो लोग इस सफेद बाल को नहीं तोड़ते, ऐसा नहीं है कि उन्हें उम्र छिपाने की इच्छा नहीं होती बल्कि वे इस डर से ऐसा नहीं करते कि एक सफेद बाल उखाड़ने से कई सफेद बाल उग सकते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ हुए परिवर्तनों के कारण भी महिलाएं अधिक प्रभावित होती हैं। पुरूषों का आकर्षण महिलाओं की तरह केवल सौंदर्य पर ही टिका हुआ नहीं होता, इसलिए उन्हें इस परिस्थिति से मुकाबला करने में कठिनाई नहीं होती। वे अपने सफेद बालों को, आंखों पर चढ़े नजर के चश्मे तथा चेहरे की झुर्रियों तक को अपने व्यक्तित्व का अंग बनाकर स्वयं को अनुभवी, विचारक और परिपक्व होने का अभिनय कर सकते हैं।
दूसरी ओर ऐसी अनेक महिलाएं मिल जाएंगी जो चश्मे के बिना कठिनाई अनुभव करती हैं किंतु अपने परिचितों के सामने चश्मे से इसलिए परहेज करती हैं ताकि उनकी ’कमजोर नजर‘ उनकी बढ़ती आयु की चुगली न कर दे।
उम्र के विषय में अगर झूठ बोलना हो तो उसके लिए याददाश्त का बहुत तेज होना आवश्यक है। केवल यह कह देने से काम नहीं चलता कि आप की आयु मात्र 30 साल है या 32 साल है। आपकी बताई गई उम्र से अपने जीवन की विशेष घटनाओं का भी तालमेल बैठाना होगा। आपका विवाह कब हुआ, किन वर्षों में आप कॉलेज में पढ़ती थी, बच्चों के जन्म के समय आप की आयु आदि अनेक ऐसी बातें हैं जिन्हें पहले से आपको हिसाब लगाकर याद रखना होगा। कई बार तो आप की मामूली सी बातचीत भी आपका भंडा फोड़ने के लिए काफी होती है।
उम्र के हिसाब से ही आपका आउटलुक, फिगर एवं पहनावा भी होना आवश्यक है। अगर आपने अपनी उम्र किसी को पचीस वर्ष बताई है किन्तु आपके उरोज पुष्ट न हों, आप बूढ़ी की तरह साड़ी बांधती हों तो आपको कोई पच्चीस वर्ष का मानने को तैयार नहीं होगा।
अपने चेहरे और बेढब शरीर की कान्तिहीनता को छिपाने के लिए नियमित व्यायाम करना और खानपान की बुरी आदतों पर नियंत्राण रखना आवश्यक है। तनाव को दूर भगाकर चेहरे की कांति को बनाये रखा जा सकता है तथा बुढ़ापे तक षोडशी बनकर रहा जा सकता है। सौंदर्य स्वयं आपकी उम्र को स्थिर करके आपको चिरयुवती बनाए रखने में सहायता करेगा।

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