डीसीडब्ल्यू में अध्यक्ष, सदस्य के पद रिक्त नहीं रह सकते : दिल्ली उच्च न्यायालय

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नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि दिल्ली सरकार के पास ‘डीसीडब्ल्यू’ में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को न भरने या वहां पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध न कराने का कोई कारण नहीं हो सकता।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील से दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) में रिक्त पदों को भरने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आयोग बंद न हो, सरकार द्वारा उठाये गए कदमों के संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा।

अदालत ने कहा, ‘‘यह आयोग महिलाओं के कल्याण के लिए कुछ महत्वपूर्ण कार्य करता है। दिल्ली महिला आयोग अधिनियम, 1994 की धारा 10 के तहत आयोग को सौंपे गए कार्यों को ध्यान में रखते हुए, अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर रिक्तियों को न भरने और दिल्ली महिला आयोग को पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध न कराने का कोई कारण नहीं हो सकता।’’

उच्च न्यायालय ने आदेश दिया, ‘‘दिल्ली सरकार के वकील से यह जानकारी मांगी जाए कि अधिकारियों ने रिक्त पदों को भरने और यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं कि आयोग बंद न हो। मामले को अगले बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया जाए।’’

अदालत बिहार के बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता के वकील, अधिवक्ता सत्यम सिंह ने कहा कि डीसीडब्ल्यू 24 जनवरी से ‘‘बंद’’ है क्योंकि फिलहाल इसमें कोई सदस्य या कर्मचारी नहीं हैं।

दिल्ली सरकार के वकील ने दलील दी कि उन्हें जनहित याचिका में किये गए दावे की पुष्टि करनी होगी।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यह विडंबना है कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद, महिलाओं के कल्याण और सुरक्षा के लिए काम करने वाला आयोग, महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़ों के बावजूद ठप पड़ा हुआ है।

याचिका में कहा गया है कि डीसीडब्ल्यू के पंगु होने से इसके वैधानिक कार्यों में व्यवधान पड़ा है और इसका कामकाज ठप पड़ गया है, जिनमें सहयोगिनी परिवार परामर्श इकाई, हेल्पडेस्क, दुष्कर्म रोधी प्रकोष्ठ, संकट हस्तक्षेप केंद्र, मोबाइल हेल्पलाइन, महिला पंचायत कार्यक्रम और महिला हेल्पलाइन 181 शामिल हैं।

इसमें कहा गया है, ‘‘अपराध के आधिकारिक आंकड़ों से इस याचिका की तात्कालिकता स्पष्ट होती है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा सितंबर 2025 में जारी ‘क्राइम इन इंडिया 2023’ रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में महिलाओं के साथ हुए अपराध के 13,000 से अधिक मामले 2023 में दर्ज किये गए, जो सभी महानगरों में सबसे अधिक हैं। इनमें 1,000 से अधिक बलात्कार के मामले शामिल हैं।’’

याचिका में कहा गया है कि डीसीडब्ल्यू का काम न करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) और 21 का हनन है।

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