ऋतुराज बसंत आ गया। अब न तो कड़ाके की ठंड है और न व्याकुल करने वाली गर्मी है। यह समशीतोष्ण ताप वाला बसंत ऋतु है इसीलिए यह ऋतुराज कहलाता है। कभी ठण्ड, तपिश, लू से दूर इस समय मन प्रकृति में एकाकार होकर आह्लादित हो उठा है। यह बसंत है। यह ऋतुराज का समय है। मानव मन कोमल भावनाओं, संवेदनाओं से झंकृत हो रहा है। मन मयूर हो गया है। प्रकृति विविध आयामी रंगों से नाच उठा है। डाल-डाल पर पुष्प का श्रृंगार हो चुका है। भौंरे गुनगुना रहे हैं, कोयल कूक रही है और पक्षियों का कलरव गुंजायमान है। इस समय क्या करें:- यह ऋतु के बदलाव का समय है। ठंड को विदा करने ग्रीष्म द्वार पर आकर खड़ा हो गया है। ऐसे समय में स्वास्थ्य सही रहेगा, तब हम मनोरम प्रकृति का आनंद उठा पाएंगे। इस समय चहुंदिश समशीतोष्ण ताप है इसलिए हमारा पाचन भी कुछ मंद है, अतएव ऐसे में गरिष्ठ शीतल भोजन नहीं करें। दिन में नहीं सोएं। इस समय कटु, तिक्त एवं कषाय रस प्रधान वस्तुओं का सेवन करें। हरी सब्जियां, मौसमी फल एवं हल्का सुपाच्य भोजन करें। दस बारह नीम की कोमल पत्तियों का सेवन करें या उसके रस का सेवन करें। हल्का व्यायाम करें। प्रातः कालीन भ्रमण करें। इससे हमें ताजी हवा मिलेगी। इससे शरीर में प्राणवायु का सही संचार होता है। ऐसे समय में हल्की दौड़ लगाना, तैरना आदि भी लाभकारी होता है। सही समय पर नियमित भोजन करें। इस ऋतु में दिन में सोना और रात में जागना हानिकारक होता है। रात को भरपूर नींद लें अन्यथा नींद नहीं लेने पर शरीर में शिथिलता, तंद्रा एवं आलस्य छाया रहेगा। शरीर ठीक प्रकार से कार्य नहीं करेगा। इस समय होने वाले रोग:- इस मौसम में जुकाम, खांसी, नजला, ज्वर आदि रोग का प्रकोप होता है, अतएव आलस त्यागें, हल्का व्यायाम करें। हल्का भोजन करें।