नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बृहस्पतिवार को कहा कि कंपनी पूरी प्रौद्योगिकी प्रणाली में कृत्रिम मेधा (एआई) को अपनाने की प्रक्रिया में है और विभिन्न उद्योगों के लिए चिप बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा समूह विविध भारतीय आंकड़ों के आधार पर एआई क्षमताओं का निर्माण कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) की दूरदृष्टि के कारण ही हम चिप और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रवेश कर सके। अगला कदम ऐसे चिप बनाना है जो पूरी तरह एआई-अनुकूलित और क्षेत्र-विशिष्ट हों। हर उद्योग के लिए अलग चिप विकसित की जाएगी और हम सबसे पहले इसे मोटर वाहन क्षेत्र के लिए तैयार करेंगे।’’
उन्होंने बताया कि ‘नमक से सॉफ्टवेयर’ तक फैला उनका समूह सिलिकॉन से लेकर सिस्टम तक, एआई-तैयार डाटा सेंटर से लेकर एप्लिकेशन और एआई एजेंट तक पूरी प्रणाली स्टैक में एआई को अपना रहा है।
चंद्रशेखरन ने कहा कि समूह भारत का पहला बड़े पैमाने का एआई-अनुकूलित डाटा सेंटर स्थापित कर रहा है, जिसे अगली पीढ़ी के एआई प्रशिक्षण और एवं ‘इन्फरेंस’ के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि समूह ने ओपनएआई के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत 100 मेगावाट क्षमता का पहला चरण स्थापित किया जाएगा जिसे आगे बढ़ाकर एक गीगावाट तक किया जाएगा। इसके अलावा, एएमडी के साथ भी सहयोग की हाल में घोषणा की गई है, जिसके तहत विश्वस्तरीय ‘एआई रैक आर्किटेक्चर’ को मजबूत डाटा अवसंरचना, इंजीनियरिंग, ऊर्जा एवं समाधान क्षमताओं के साथ जोड़कर भारत में वैश्विक मानकों के अनुरूप टिकाऊ एआई क्षमता विकसित की जाएगी।
चेयरमैन ने कहा कि समूह का पूरा एआई ढांचा विविध भारतीय डाटा संपत्तियों पर आधारित होगा, ताकि बुनियादी मॉडल के ऊपर भारतीय संदर्भों की विविधता के अनुरूप बुद्धिमत्ता उपलब्ध कराई जा सके।
इसके अलावा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और टाटा कम्युनिकेशंस मिलकर उद्योगों के लिए एआई ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समूह हर उद्योग के लिए ‘एजेंटिक’ समाधान तैयार करेगा और वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर इसे दुनिया भर के उद्यमों तक पहुंचाएगा।
चंद्रशेखरन ने कहा, ‘‘ यह वादों को हकीकत में तब्दील करने का समय है, ताकि हम समृद्धि प्रदान कर सकें। हम एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। यह प्रचुर बुद्धिमत्ता का युग है, जहां दुर्लभ संसाधन विश्वास, संरक्षकता एवं मानवीय क्षमता हैं।”
उन्होंने एआई की परिवर्तनकारी क्षमता की तुलना भाप इंजन और इंटरनेट जैसे ऐतिहासिक बुनियादी ढांचे के नवाचारों से की और कहा कि लक्ष्य एआई को हर व्यक्ति और हर उद्यम के लिए सुलभ बनाना है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमें एआई उपकरण देश के अंतिम व्यक्ति तक, बल्कि पृथ्वी के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने चाहिए।’’