ढाका, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही, नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस नीत अंतरिम सरकार का 18 महीने से जारी शासन समाप्त हो गया, जिस दौरान बांग्लादेश में राजनीतिक अनिश्चितता और अराजकता की स्थिति रही थी।
रहमान के प्रधानमंत्री बनने को बांग्लादेश के लिए एक नयी शुरूआत के तौर पर देखा जा रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बांग्लादेश के शीर्ष राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व की उपस्थिति में जातीय संसद के ‘साउथ प्लाजा’ के खुले परिसर में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी थे।
राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने रहमान (60) को परंपरा से हटते हुए, बंगभवन के बजाय जातीय संसद के ‘साउथ प्लाजा’ में पद की शपथ दिलाई।
आम चुनावों में अपनी पार्टी को शानदार जीत दिलाने वाले रहमान ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री के तौर पर कानून के अनुसार कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करूंगा।’’
बिरला के अलावा, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे, पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसन इकबाल, नेपाल की विदेश मंत्री बाला नंदा शर्मा और श्रीलंका के स्वास्थ्य और जनसंचार मंत्री नलिंदा जयतिस्सा भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
शपथ ग्रहण के बाद, रहमान ने पद और गोपनीयता की शपथ वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री के पद पर उनका कार्यकाल पांच वर्षों का होगा।
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत जियाउर रहमान के पुत्र तारिक रहमान 17 वर्षों तक स्वनिर्वासन में लंदन में रहने के बाद दो महीने पहले स्वदेश लौटे थे। खालिदा जिया का पिछले साल 30 दिसंबर को निधन हो गया था।
तारिक रहमान पहली बार प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने अंतरिम सरकार प्रमुख मोहम्मद यूनुस की जगह ली, जिनके शासनकाल के दौरान ढाका के नयी दिल्ली के साथ संबंधों में काफी गिरावट आई थी।
शेख हसीना नीत अवामी लीग सरकार के सत्ता से बेदखल होने के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार की बागडोर संभाली थी।
दिन में, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के सांसदों ने रहमान को संसदीय दल का नेता चुना।
राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने समारोह में, 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों को भी शपथ दिलाई। कार्यक्रम में भारत और पाकिस्तान सहित पड़ोसी देशों के कई नेता उपस्थित थे।
नयी मंत्रिपरिषद में अल्पसंख्यक समुदाय के दो सदस्य, बीएनपी उपाध्यक्ष एवं हिंदू समुदाय से आने वाले निताई रॉय चौधरी तथा बौद्ध धर्मावलंबी दीपेन दीवान शामिल किये गए हैं।
एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में, नयी मंत्रिपरिषद ने निवर्तमान अंतरिम शासन के सुरक्षा सलाहकार, खलीलुर रहमान को एक मंत्री के रूप में शामिल किया, जबकि कई वरिष्ठ बीएनपी नेताओं को बाहर रखा गया।
मंत्रिमंडल विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कैबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के विभागों की घोषणा बाद में की जाएगी, हालांकि कई मुख्यधारा के मीडिया संस्थान ने अपुष्ट सूत्रों का हवाला देते हुए उनमें से कई के विभागों के नाम बताये।
बीएनपी द्वारा जारी एक सूची के अनुसार, वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री नियुक्त किया गया है, जबकि वित्त मंत्रालय का प्रभार अमीर खसरू महमूद चौधरी को दिया गया है।
बीएनपी के सलाहुद्दीन अहमद को गृह मंत्री नियुक्त किया गया है, जबकि इकबाल हसन महमूद टुकू को बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री बनाया गया है।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनावों में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतीं, जबकि कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें हासिल कीं।
अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
चुनाव परिणाम बीएनपी के लिए संजीवनी साबित हुआ। पार्टी अवामी लीग के 15 वर्षों के शासनकाल में निशाने पर रही थी। अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के कारण अवामी लीग सरकार सत्ता से बेदखल हुई थी।
इससे पहले 13वीं जातीय संसद (जेएस) के नवनिर्वाचित सांसदों ने संसद सदस्य के रूप में शपथ ली।
चुनाव के बाद एक प्रेस वार्ता में रहमान ने राष्ट्रीय हित में ‘‘राष्ट्रीय एकता’’ और ‘‘शांति’’ की अपील की तथा आगाह किया कि विभाजनकारी नीतियां लोकतंत्र को कमजोर करेंगी।
उन्होंने कहा था कि देश एक नाजुक अर्थव्यवस्था, कमजोर संस्थाओं और बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति का सामना कर रहा है।
रहमान ने कहा, ‘‘हमारे रास्ते और विचार भले ही अलग-अलग हों, लेकिन देश के हित में हमें एकजुट रहना होगा। मेरा दृढ़ विश्वास है कि राष्ट्रीय एकता हमारी सामूहिक शक्ति है, जबकि विभाजन हमारी कमजोरी है।’’
उन्होंने कहा कि नयी सरकार के समक्ष दो प्रमुख चुनौतियां हैं – अर्थव्यवस्था को संभालना और सुशासन सुनिश्चित करना।
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान और पार्टी के उप प्रमुख सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर को क्रमशः सदन में नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है।
