इस साल 9.1 प्रतिशत औसत वेतन वृद्धि का अनुमान: सर्वेक्षण

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मुंबई, 24 फरवरी (भाषा) देश में इस साल विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारियों को औसतन 9.1 प्रतिशत वेतन वृद्धि मिलने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की 8.9 प्रतिशत वेतन वृद्धि से थोड़ा अधिक है। मंगलवार को एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया।

वैश्विक पेशेवर सेवा कंपनी एओएन ने अपने ‘वार्षिक वेतन वृद्धि एवं कारोबार सर्वेक्षण 2025-26’ का हवाला देते हुए कहा कि इस साल 9.1 प्रतिशत की अनुमानित वेतन वृद्धि वर्ष 2025 में दर्ज 8.9 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि से थोड़ी अधिक है।

एओएन के सर्वेक्षण का 32वां संस्करण देश के 45 उद्योग क्षेत्रों में सक्रिय 1,400 से अधिक संगठनों के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 में वेतन वृद्धि का अनुमान विभिन्न उद्योगों में अलग-अलग रहेगा। रियल एस्टेट एवं अवसंरचना क्षेत्रों के कर्मचारियों को सर्वाधिक 10.2 प्रतिशत की वेतन वृद्धि मिलने की उम्मीद है। इसके बाद गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में कार्यरत कर्मचारियों का वेतन औसतन 10.1 प्रतिशत बढ़ सकता है।

मोटर वाहन एवं वाहन विनिर्माण क्षेत्रों के कर्मचारियों को 9.9 प्रतिशत की वृद्धि मिलने की संभावना है। वहीं, इंजीनियरिंग डिजाइन सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी 9.9 प्रतिशत की वृद्धि मिल सकती है।

सर्वेक्षण में पाया गया कि इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण क्षेत्र के कर्मचारियों और खुदरा क्षेत्र के कर्मचारियों को औसतन 9.5-9.5 प्रतिशत की वेतन वृद्धि मिलने की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये रुझान दर्शाते हैं कि भारत में नियोक्ता बदलते बाजार परिवेश में विशेष कौशल वाली प्रतिभाओं के लिए कायम प्रतिस्पर्धा के बीच प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं ग्राहक-सामना क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

एओएन इंडिया में साझेदार (प्रतिभा समाधान) रूपांक चौधरी ने कहा, ‘‘भारत अपनी वृद्धि यात्रा के अगले चरण में एक मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद के साथ कदम रख रहा है। कंपनियों के भू-राजनीतिक अनिश्चितता से जूझने के बावजूद सुदृढ़ घरेलू मांग, मुद्रास्फीति में नरमी और नए व्यापार समझौते मध्यम अवधि के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण में योगदान दे रहे हैं।’’

सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर घटकर 16.2 प्रतिशत रह गई, जो कोविड-19 वैश्विक महामारी से पहले के स्तरों के करीब और पिछले तीन वर्षों से जारी गिरावट के रुझान को आगे बढ़ाती है। वर्ष 2024 में यह दर 17.7 प्रतिशत और 2023 में 18.7 प्रतिशत रही थी।

एओएन इंडिया में एसोसिएट पार्टनर (प्रतिभा समाधान) अमित कुमार ओटवानी ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने से संगठन दशकों में सबसे महत्वपूर्ण नियामकीय परिवर्तन में से एक का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “वेतन की मानकीकृत परिभाषा एवं विस्तारित सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों के कारण कई नियोक्ता वेतन संरचना की समीक्षा और पुनर्गठन कर रहे हैं। इन बदलावों के बारे में स्पष्ट संवाद कार्यबल के विश्वास और स्थिरता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।”

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