स्टालिन ने संविधान में संशोधन का प्रस्ताव दिया, कहा-संघवाद का संरचनात्मक पुनर्गठन जरूरी

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चेन्नई, 18 फरवरी (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र में संघवाद और राज्यों की स्वायत्तता को मजबूत करने के लिए संविधान में संशोधन का बुधवार को प्रस्ताव रखा और देश के संघवाद का ‘‘संरचनात्मक रूप से पुनर्गठन’’ किए जाने का आह्वान किया।

स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में केंद्र-राज्य संबंधों पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति की रिपोर्ट का पहला भाग प्रस्तुत करते हुए कहा कि संघवाद विश्वास और स्वायत्तता पर आधारित होता है।

राज्य में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष स्टालिन ने कहा, ‘‘भारत के संघवाद को संरचनात्मक रूप से पुनर्व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। यदि हम चाहें तो संविधान में पुनः संशोधन कर सकते हैं। सार्थक संघवाद नियंत्रण के बारे में नहीं बल्कि विश्वास, स्वायत्तता और लोगों की वास्तविकताओं के अनुरूप शासन के बारे में है।’’

उन्होंने कहा कि द्रमुक के संस्थापक एवं दिवंगत मुख्यमंत्री सी एन अन्नादुरई ने 1967 में कहा था कि भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने के लिए (भारत) संघ का वास्तव में पर्याप्त रूप से मजबूत होना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने ‘‘राज्यों के लिए स्वायत्तता और केंद्र में संघवाद’’ के सिद्धांत के माध्यम से इस दर्शन को आगे बढ़ाया और 1969 में न्यायमूर्ति पी.वी. राजमन्नार के नेतृत्व में केंद्र-राज्य संबंधों पर पहली स्वतंत्र समिति की स्थापना की।

स्टालिन ने कहा कि द्रमुक राज्यों में स्वायत्तता और केंद्र में संघवाद की नीति का पालन करता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अब भी केंद्र से अधिकार प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रही हैं और हर चीज के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम कब तक ऐसी स्थिति में रहेंगे?…’’

उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट ‘‘बिल्ली के गले में घंटी बांधने’’ जैसी है।

स्टालिन ने कहा, ‘‘आज के दिन हम संविधान में संशोधन की पहल करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य सरकारों को सभी आवश्यक शक्तियां प्राप्त हों।’’

उन्होंने तर्क दिया कि देश तभी समृद्ध होगा जब राज्य विकसित हों और केंद्र तथा राज्य दोनों (शासन में) ‘‘साझेदार’’ हों, न कि ‘‘प्रतिस्पर्धी’’। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की स्वायत्तता ही ‘‘दमन के विरुद्ध एकमात्र उपाय’’ होगी।

उन्होंने कहा कि पिछले 76 वर्ष में भारतीय संविधान में 106 बार संशोधन किया जा चुका है, ‘‘यदि हम चाहें तो भारतीय संविधान में फिर से संशोधन कर सकते हैं।’’

केंद्र-राज्य संबंधों पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति ने 16 फरवरी को मुख्यमंत्री को अपनी पहली रिपोर्ट सौंपी। समिति का गठन 15 अप्रैल, 2025 को किया गया था।

उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने समकालीन संघीय चुनौतियों की विस्तृत समीक्षा की तथा संवैधानिक ढांचे के भीतर संघीय संतुलन को बहाल करने और वास्तविक सहकारी संघवाद को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘‘ठोस एवं कार्रवाई योग्य’’ सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

अंग्रेजी और तमिल में प्रस्तुत पहले भाग में 10 अध्याय हैं तथा इतने ही अध्यायों वाले दो अन्य भाग तैयार किए जा रहे हैं।

यह पहल संघ-राज्य संबंधों की राष्ट्रीय स्तर की चौथी प्रमुख समीक्षा है और तमिलनाडु द्वारा की गई दूसरी समीक्षा है। तमिलनाडु इससे पहले राजमन्नार समिति (1969 से 1971) के माध्यम से इस चर्चा का नेतृत्व कर चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सरकारिया आयोग (1983 से 1988) और पुंछी आयोग (2007 से 2010) ने केंद्र-राज्य संबंधों की पड़ताल की और महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं। उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई है।’’

भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय, चेन्नई के पूर्व कुलपति के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन समिति के सदस्य हैं।

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