रास में राघव चड्ढा ने खाद्य मिलावट का मुद्दा उठाया, एफएसएसएआई को मजबूत करने की मांग की

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नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) सदस्य राघव चड्ढा ने देशभर में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर चिंता जताते हुए इसे “गंभीर स्वास्थ्य संकट” करार दिया और खाद्य सुरक्षा नियामक ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण’ (एफएसएसएआई) को मजबूत करने की मांग की।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान चड्ढा ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि खाद्य मिलावट बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। उन्होंने सरकार से एफएसएसएआई को पर्याप्त अधिकार और संसाधन देने, परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने तथा जुर्माने और दंड को सख्त करने का आग्रह किया।

चड्ढा ने उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि गरम मसाले में ईंट और लकड़ी का बुरादा मिलाया जा रहा है, चाय में कृत्रिम रंग, चिकन और पोल्ट्री उत्पादों में ‘एनाबॉलिक स्टेरॉयड’, शहद में शुगर सिरप और पीला रंग, तथा मिठाइयों में देसी घी की जगह वनस्पति तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शुद्धता का लेबल लगाया जाता है लेकिन दूध, पनीर, आइसक्रीम, सब्जी, खाद्य तेल, मसाले, चाय, शहद, घी से लेकर कोई भी उत्पाद मिलावट से बच नहीं पाया है।

चड्ढा ने कहा, “जब कोई मां अपने बच्चे को यह सोचकर दूध देती है कि उसमें कैल्शियम और प्रोटीन है, तो उसे पता नहीं होता कि वह बच्चे को दूध और डिटर्जेंट का खतरनाक मिश्रण दे रही है।”

चड्ढा ने दावा किया कि शोध के अनुसार 71 प्रतिशत दूध के नमूनों में यूरिया और 64 प्रतिशत में ‘सोडियम बाइकार्बोनेट’ पाए गए हैं, जबकि देश में दूध का उत्पादन बेची जा रही मात्रा से कम है।

आप सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि सब्जियों में ऑक्सीटोसिन जैसे हानिकारक रसायन का इंजेक्शन लगाया जा रहा है, जिससे चक्कर आना, सिरदर्द, हृदय गति रुकने, बांझपन और कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि 2014-15 से 2025-26 के बीच जांचे गए 25 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए गए।

चड्ढा ने दावा किया कि देश की दो प्रमुख गरम मसाला कंपनियों के भारत में बने उत्पादों को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में कैंसरकारी कीटनाशक पाए जाने के कारण प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन वे अब भी घरेलू बाजार में बिक रहे हैं। उन्होंने कहा, “जो खाद्य पदार्थ अन्य देशों में पालतू जानवरों को भी नहीं खिलाए जाते, वे भारत में बेचे जा रहे हैं।”

उन्होंने एफएसएसएआई को पर्याप्त मानवबल और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने, जुर्माना राशि बढ़ाने और मिलावटी उत्पादों को बाजार से वापस बुलाने के लिए ‘सार्वजनिक रिकॉल व्यवस्था’ शुरू करने का सुझाव दिया।

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