बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने का नोटिस देने की तैयारी में विपक्ष

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नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने की तैयारी में है और इसके लिए सदन के सदस्यों के हस्ताक्षर लिए जाने की प्रक्रिया जारी है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 94 सी के तहत यह प्रस्ताव लाया जा सकता है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सदन में की गई टिप्पणियों को लेकर उन पर कार्रवाई शुरू नहीं करने और कांग्रेस की महिला सांसदों पर बिना साक्ष्य के आरोप लगाये जाने के मामले में भी अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव के लिए नोटिस देने पर विचार किया जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही लोकसभा में एक वैधानिक प्रस्ताव लाया जा सकता है।

विपक्ष प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा के 100 सदस्यों के हस्ताक्षर लेने का प्रयास कर रहा है।

सूत्रों ने बताया कि दोपहर दो बजे तक करीब 20 सांसदों ने प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए थे तथा 100 सांसदों के हस्ताक्षर होने के बाद इसे लोकसभा सचिवालय को सौंपा जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि इस नोटिस पर अधिक से अधिक विपक्षी दलों के सांसदों के हस्ताक्षर लेने का प्रयास किया जा रहा है।

इस मामले पर तृणमलू कांग्रेस के रुख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सूत्रों ने बताया कि आज सुबह संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में, (लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ) अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार किया गया।

बैठक में तृणमूल कांग्रेस, वाम दल, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (शप) सहित कुछ अन्य पार्टियों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया।

बीते दो फरवरी को, राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा विषय उठाने की अनुमति नहीं मिलने, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने तथा अन्य मुद्दों पर सदन में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।

विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के लोगों को कुछ भी बोलने की छूट दी गई है।

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