मुंबई, 13 फरवरी (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि राज्य भर में इस अदालत की इमारतों और न्यायाधीशों के आवासीय परिसरों तथा सभी अधीनस्थ अदालतों की यदि कोई सुरक्षा ऑडिट की गई है तो राज्य पुलिस उसका विवरण सौंपे।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर उच्चतम न्यायालय द्वारा चिंता जताये जाने के मद्देनजर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक याचिका पर इस सप्ताह की शुरुआत में यह आदेश पारित किया।
झारखंड के धनबाद में एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की मृत्यु के बाद, उच्चतम न्यायालय ने 2021 में इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी।
महाराष्ट्र के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने 10 फरवरी को मुंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि वह अदालत परिसरों की सुरक्षा और न्यायाधीशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में अदालत को जानकारी देंगे।
अदालत ने मामले को स्वीकार कर लिया और आगे की सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय की, लेकिन की गई कोई भी सुरक्षा ऑडिट का विवरण मांगा।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हम पुलिस महानिदेशक से उच्च न्यायालय और उन भवनों की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट, यदि कोई हो, की एक प्रति प्रस्तुत करने का अनुरोध करते हैं, जहां मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहते हैं। इन स्थानों में गोवा, औरंगाबाद, नागपुर स्थित पीठ और कोल्हापुर की सर्किट पीठ तथा सभी जिलों की अधीनस्थ अदालतें शामिल हैं।’’
धनबाद के एक न्यायाधीश की हत्या के बाद देशभर में न्यायिक अधिकारियों द्वारा सामना किये जा रहे खतरों का संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह एक सुरक्षित वातावरण बनाए ताकि न्यायाधीश और वकील निडर होकर काम कर सकें।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि देशभर में इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ व्यापक परामर्श आवश्यक है।