ममता ने कविताओं के माध्यम से किया एसआईआर का विरोध

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नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ जारी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विरोध का एक अनूठा रूप अपनाया और इस मुद्दे पर 26 कविताएं लिखी हैं।

बनर्जी ने ‘‘एसआईआर: 26 इन 26’’ नामक पुस्तक लिखी है जिसमें ‘पैनिक’ (घबराहट), ‘डूम’ (विनाश), ‘मॉकरी’ (उपहास), ‘फाइट’ (लड़ाई), ‘डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र) और ‘हू इज टू ब्लेम’ (दोष किसे दें) शीर्षक वाली कविताएं उल्लेखनीय हैं। इस पुस्तक का विमोचन 22 जनवरी को 49वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में हुआ।

पुस्तक की प्रस्तावना में बनर्जी ने इसे ‘‘विनाशकारी खेल में अपनी जान गंवाने वालों’’ को समर्पित किया है और आरोप लगाया है कि बंगाल के लोगों पर ‘‘निरंतर भय का अभियान’’ चलाया गया है।

वह लिखती हैं कि ये कविताएं ‘‘प्रतिरोध की भावना’’ से उत्पन्न होती हैं।

‘डूम’ शीर्षक वाली कविता में वह लिखती हैं, ‘‘हम कब तक चुप रहेंगे? इस खामोशी का मतलब शांति नहीं है – इसका मतलब है कि जीवन नष्ट हो रहे हैं, धीरे-धीरे लुप्त हो रहे हैं।’’

कविता की अगली पंक्तियों में लिखा है, ‘‘हमें जवाब चाहिए और जवाब जनता की अदालत में मिलेंगे।’’

‘मॉर्ग’ (मुर्दाघर) शीर्षक वाली एक अन्य कविता में कहा गया ‘‘लोकतंत्र को पराजित किया जा रहा है, उसे बुरी तरह से कुचला जा रहा है’’ और दावा किया गया है कि प्रदर्शन स्वयं ‘‘एजेंसी-राज’’ की गिरफ्त में आ गए हैं।

यहां संवाददाता सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उन्होंने यात्रा के दौरान तीन दिनों में यह किताब लिखी थी।

बनर्जी की 163 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने कहा कि वह पूर्व सांसद हैं लेकिन पेंशन नहीं लेतीं और वह मुख्यमंत्री पद का वेतन भी नहीं लेती हैं। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं पुस्तकों और अन्य रचनात्मक कार्यों से मिलने वाली रॉयल्टी से ही उनके निजी खर्च पूरे होते हैं।

तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक अपनी बहुमुखी रचनात्मक गतिविधियों के लिए जानी जाती हैं। एक लेखिका के रूप में उन्होंने कविता, लघु कथाएं, निबंध और राजनीतिक टिप्पणी सहित विभिन्न विधाओं में लेखन किया है।

वह चित्रकार भी हैं, जिनकी कई कृतियों की प्रदर्शनी भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगाई जा चुकी है। उन्होंने सामाजिक विषयों, प्रकृति से लेकर मानवीय भावनाओं तक विभिन्न विषयों पर गीतों की रचना की है।

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