लवलीना और अरुंधति की अगुआई में भारत ने बॉक्सैम एलीट 2026 में नौ स्वर्ण पदक जीते

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ला नूसिया (स्पेन), आठ फरवरी (भाषा) ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन और पूर्व युवा विश्व चैंपियन अरुंधति चौधरी की अगुआई में भारत ने बॉक्सैम एलीट इंटरनेशनल 2026 टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए नौ स्वर्ण पदक जीते।

शनिवार को सात एलीट महिला फाइनल में भारतीयों ने प्रतिनिधित्व किया। वहीं 54 किग्रा वर्ग में फाइनल दो भारतीयों के बीच हुआ। भारतीय महिलाओं ने प्रत्येक में स्वर्ण पदक जीता।

बॉक्सैम एलीट 2026 में 20 देशों के 200 से अधिक मुक्केबाजों ने भाग लिया। भारत नौ स्वर्ण, तीन रजत और सात कांस्य पदक के साथ प्रतियोगिता में सबसे सफल रहा।

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, ‘‘बॉक्सैम एलीट ने मुक्केबाजों को वैसा ही अनुभव दिया जिसकी हम सत्र के इस चरण में तलाश कर रहे थे। स्पेन में प्रदर्शन, विशेष रूप से फाइनल में जीत का अनुपात हमारे कार्यक्रम की प्रगति को दर्शाता है। पूरे दल को एक उत्कृष्ट अभियान के लिए बधाई। ’’

भारतीय महिलाओं ने अंतिम दिन बेहतरीन प्रदर्शन किया। मंजू रानी (48 किग्रा) और नीतू (51 किग्रा) ने क्रमशः स्पेन की मार्टा लोपेज और नोएलिया गुटिरेज पर सर्वसम्मत जीत के साथ शुरुआत की। फिर पूनम (54 किग्रा) ने एक कड़े मुकाबले वाले हमवतन प्रीति को हराया।

प्रिया (60 किग्रा) और अरुंधति (70 किग्रा) ने यूक्रेनी प्रतिद्वंद्वियों पर 5-0 से शानदार जीत हासिल की।

लवलीना (75 किग्रा) ने संयम से खेलते हुए इंग्लैंड की मैरी-केट स्मिथ को 4-1 से हराया। नैना (80 किग्रा) ने यूक्रेन की रायसा पिस्कुन पर जीत से क्लीन स्वीप पूरा किया।

महिलाओं के प्रदर्शन पर बात करते हुए भारतीय महिला मुख्य कोच सांटियागो नीवा ने कहा, ‘‘महिलाओं का प्रदर्शन असाधारण था। सिर्फ पदक के मामले में ही नहीं बल्कि उनके अनुशासन, स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ मुक्केबाजी के लिए। सात फाइनल में पहुंचकर और सभी सात जीतना, यह दिखाता है कि पूरी प्रणाली में कितना अच्छा काम हो रहा है। ’’

पुरुषों के फाइनल में सचिन (60 किग्रा) ने कनाडा के केओमा-अली अल अहमदीह को 3-2 से हराया जबकि आकाश (75 किग्रा) ने कजाखस्तान के अमन कोंसबेकोव पर 3-2 की जीत के बाद एक और स्वर्ण पदक जीता।

दीपक (70 किग्रा) और अंकुश (80 किग्रा) को क्रमशः कजाखस्तान और यूक्रेन के मजबूत प्रतिद्वंद्वियों का सामना करने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

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