नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने भाषण के कुछ हिस्से सदन की कार्यवाही से हटाए जाने पर असंतोष जताया।
शून्यकाल समाप्त होने पर जब सभापति सी पी राधाकृष्णन ने प्रश्नकाल शुरू करने को कहा तब खरगे ने अपनी बात कहने की अनुमति मांगी।
अनुमति मिलने पर खरगे ने कहा ‘‘ राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के समय मैंने शुरू में ही कह दिया था कि राष्ट्रपति का अभिभाषण राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को उठाने का एक बेहतरीन अवसर था लेकिन इस अभिभाषण में वह परिलक्षित नहीं होता। इसीलिए मैंने अपनी बात व्यापक रूप से रखी थी।’’
उन्होंने कहा ‘‘लेकिन राज्यसभा की वेबसाइट में मैंने देखा कि मेरे अभिभाषण का बड़ा हिस्सा, बिना कोई कारण बताए हटा दिया गया। मैंने अपने भाषण में तथ्यों सहित बात रखी है और सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना की है जो नेता प्रतिपक्ष होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है। मुझे लगता है कि वे नीतियां भारतीय जनमानस पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।’’
खरगे ने कहा कि उन्होंने कुछ भी असंसदीय नहीं कहा था इसलिए उनके भाषण के हटाए गए अंशों को सदन की कार्यवाही में शामिल किया जाना चाहिए।
सभापति ने कहा कि आसन की ओर से फैसला नियमों के अनुरूप लिया गया है।
सदन में मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राज्यसभा की नियमावली के नियम 261 के तहत भाषण में बोले गए शब्द अगर असंसदीय हों तो उन्हें सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आसन ने अगर भाषण के किसी अंश को लेकर व्यवस्था दी है कि वह असंसदीय है तो उसे कार्यवाही से हटा दिया जाता है।
सीतारमण ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के भाषण के संबंध में यही हुआ है और सभी को आसन की व्यवस्था तथा नियमों का सम्मान करना चाहिए।
कांग्रेस सदस्यों ने इस पर विरोध जताया। सभापति ने कहा कि सदस्य आसन की व्यवस्था पर सवाल नहीं उठा सकते।