म्यूनिख, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के इतर जर्मनी, कनाडा, फ्रांस और चेक गणराज्य के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।
जयशंकर 13 से 15 फरवरी तक म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने अपने जर्मन समकक्ष जोहान वेडफुल के साथ एक ‘‘सार्थक’’ द्विपक्षीय बैठक की और दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति का आकलन किया।
उन्होंने कहा, ‘‘क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।’’
विदेश मंत्री ने चेक गणराज्य के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री पेट्र मैकिंका से भी मुलाकात की और आर्थिक तथा रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि जल्द ही उनका भारत में स्वागत कर सकेंगे।’’
जयशंकर ने की विदेश मंत्री अनीता आनंद से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा, ‘‘भारत-कनाडा संबंध लगातार स्थिर प्रगति कर रहे हैं।’’
उन्होंने फ्रांस और क्रोएशिया के विदेश मंत्रियों क्रमश: ज्यां-नोएल बैरो और गोर्डन ग्रलिक-रैडमैन से भी मुलाकात की।
इससे पहले जयशंकर ने जी7 देशों के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की, जहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार के लिए भारत के समर्थन को दोहराया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत ने जनवरी में 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया है।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्हें जी7 विदेश मंत्रियों के साथ संवाद कर खुशी हुई और उन्होंने ‘यूएन एट 80’ एजेंडा के समर्थन को दोहराया, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सार्थक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन की शुरुआत ‘दिल्ली डिसाइडेड: मैपिंग इंडिया की पॉलिसी कैलकुलस’ नामक गोलमेज चर्चा से की, जिसका आयोजन अनंता एस्पेन सेंटर ने किया था, जो एक गैर-लाभकारी संगठन है।
विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने बहुध्रुवीयता की मांगों को पूरा करने के लिए ‘‘फुर्तीली और गतिशील विदेश नीति’’ के महत्व को रेखांकित किया।