नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) एआई इम्पैक्ट समिट से पहले सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि भारत दुनिया को जो खास संदेश देना चाहता है, वह यह है कि कृत्रिम मेधा (एआई) को जन-केंद्रित और समावेशी रहना चाहिए और इसमें एआई संसाधनों तक लोकतांत्रिक तरीके से पहुंच हो।
कृष्णन ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘एआई को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक ताकत होना चाहिए, जिसमें भारत और वैश्विक दक्षिण सहित दुनिया के सभी हिस्सों में वृद्धि को बढ़ावा देने की क्षमता हो।
कृष्णन ने कहा, ‘‘हम जो खास संदेश देना चाहते हैं, वह यह है कि एआई के साथ जो कुछ भी हो, वह जन-केंद्रित और समावेशी होना चाहिए। एआई संसाधन तक लोकतांत्रिक पहुंच होनी चाहिए, और इसे इस तरह से किया जाना चाहिए कि लोग और इंसान इस प्रक्रिया के केंद्र में हों।’’
जैसे-जैसे देश अलग-अलग क्षेत्र में एआई को गहराई से अपनाने की तैयारी कर रहे हैं, भारत उभरती प्रौद्योगिकी की दुनिया में बराबर वृद्धि के लिए खुद को एक आवाज़ के तौर पर पेश कर रहा है।
कृष्णन के अनुसार, बड़ा लक्ष्य यह पक्का करना है कि एआई सच में एक समावेशी प्रौद्योगिकी बने, जिसमें खुशहाली का फायदा सभी तक पहुंचे।
भारत, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह देश को एआई के कामकाज के तरीके, सुरक्षा और आर्थिक वृद्धि पर जरूरी वैश्विक वार्ता के केंद्र में रखेगा।
यह शिखर सम्मेलन नीति-निर्माताओं, उद्योग के दिग्गजों और प्रौद्योगिकी नवोन्मेषकों को ऐसे समय में एक साथ लाएगा जब देश एआई एजेंडा तय करने की होड़ में लगे हैं।
कृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘सकारात्मक प्रभाव’ के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जो दुनिया को तेजी से वृद्धि की राह पर ले जा सके।
उन्होंने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का मकसद आने वाले वर्षों में वैश्विक प्रक्रियाओं को आकार देने वाली प्रौद्योगिकी को कैसे अपनाया जाए, इस पर देशों के बीच सोच को बढ़ावा देना है।
कृष्णन ने कहा, ‘‘हमें इसे पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़े सकारात्मक प्रभाव के तौर पर देखना होगा।
उन्होंने कहा कि इस बड़ी बैठक में निवेश की घोषणाएं और भागीदारी हो सकती हैं, लेकिन यह शिखर सम्मेलन एआई की वैश्विक समझ को गहरा करने, इंसानियत पर इसके असर का आकलन करने और सभी के लिए इसके सकारात्मक और फायदेमंद असर को ज़्यादा से ज़्यादा करने के लिए जरूरी कदमों पर विचार-विमर्श करने का एक मंच है।
कृष्णन ने कहा, ‘‘यह एआई के बारे में हमारी समझ को बढ़ाने के लिए एक शिखर सम्मेलन है। यह इस बात को बढ़ाने के लिए कि हम कैसे मानते हैं कि एआई इंसानियत पर असर डालेगा, और यह पक्का करने के लिए हमें क्या करने की ज़रूरत है कि एआई का फायदेमंद और सकारात्मक असर जितना हो सके उतना बढ़े।’’