वैश्विक दक्षिण में भारत का नेतृत्व !

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वैश्विक दक्षिण जिसे “तीसरी दुनिया” के नाम से जाना जाता है। विकासशील नवोदित राष्ट्र- राज्यों का समूह है जो वित्त,  तकनीकी विशेषज्ञता, तकनीकी शोध, नवाचार एवं  नवोन्मेष में पिछड़े हुए हैं। मौलिक स्तर पर ये राष्ट्र – राज्य गरीबी, बीमारी, आतंकवाद और उग्रवाद से पीड़ित हैं। विकसित राष्ट्र राज्यों के द्वारा जलवायु न्याय के लिए अत्याचार, वैश्विक स्तर के साम्यवादी  दादाओं (रूस एवं चीन) और वैश्विक दरोगा (संयुक्त राज्य अमेरिका) के भितरघाती राजनीति व नव  उपनिवेशवादी राजनीति ग्रसित राष्ट्र – राज्यों से ‘ आर्थिक सहायता ‘ की आवश्यकता है।

                                                           

भारत हर वैश्विक मंच पर ‘ ग्लोबल साउथ’ के हितों को पूरी मजबूती से उठा रहा है। भारत का यह सदप्रयास है कि जो भी नवाचार करें, उसे संपूर्ण ‘ ग्लोबल साउथ’  एवं ‘ कॉमनवेल्थ   देशों ‘ को फायदा हों। भारत वैश्विक मंचों पर विकासशील एवं अल्प- विकसित देशों के मुद्दों को मजबूती से उठा रहा है। भारत सभी लोकतांत्रिक देशों  के विकास में निरंतर सहयोग कर रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएं वर्तमान में लोकतंत्र को स्थिरता, गति एवं व्यापकता प्रदान  कर रही है। भारत वैश्विक स्तर का तेजी से उभरता प्रमुख अर्थव्यवस्था है जिसका विकास दर 7%  के रफ्तार से उदीयमान अर्थव्यवस्था बना हुआ है। भारत के जन- केंद्रित नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं एवं  लोकसम्मत  विधियों से लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक संस्कृति में उन्नयन हो रहा है।

 

                                             

समकालीन वैश्विक परिदृश्य में भारत के दूरदर्शी और राजनय में  कौशल केंद्रित नेतृत्व इन विकासशील राष्ट्र- राज्यों को नेतृत्व दिया है। भारत सुरक्षा और संरक्षण में  दक्षिण एशिया में” बड़े भाई” की भूमिका में नेतृत्व कर रहा है तो विकासशील राष्ट्र – राज्यों को औषधि के क्षेत्र में सहयोगी राज्य प्रत्यय की भूमिका का निर्वहन कर रहा है। भारत वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के’ खाई’ को  मिटाने का सफलतम और दूरदर्शी प्रयास कर रहा है। भारत इन राष्ट्र- राज्यों के लिए संरक्षक की भूमिका में  भय और हताशा को मिटाने का प्रयास कर रहा है जिससे जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर एकीकृत और सांगठनिक दृष्टिकोण का उन्नयन किया जा  सकें।

भारत अपने नेतृत्व और उभरते व्यक्तित्व के द्वारा लोकतांत्रिक शासन( वैश्विक स्तर पर तानाशाही की समाप्ति), मानवाधिकार( प्रत्येक राष्ट्र- राज्य अपने घरेलू संवैधानिक व्यवस्था में मानवाधिकार को सुरक्षा और लिपिबद्ध करें) एवं मानवाधिकार की सुरक्षा में अपना  यथोचित प्रयास करें।

                                             

बुनियादी ढांचे और औद्योगिक संरचना में निवेश को प्रोत्साहित करना है। भारत का विचार है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों को स्थानीय चुनौतियों का सामना एवं समाधान करने के लिए सबल करना है। वैश्विक दक्षिण की जटिल सामूहिक चुनौतियों के लिए लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा ,जलवायु और बहुपक्षीय शासन को संबोधित करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की सामयिक  परिवेश में आवश्यकता है। वैश्विक दक्षिण के समूह, राष्ट्र- राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा, विकास क्षेत्र, टिकाऊ कृषि ,वानिकी प्रथाओं, पारिस्थितिक पर्यटन संरक्षण प्रयास, जलवायु लचीलापन और अनुकूलन पहल और हरित बुनियादी ढांचा विकास में सराहनीय पहल किया है। इन देशों ने डिजिटल तकनीकी, नवाचार  केंद्रों के उन्नयन, आईटी, सॉफ्टवेयर उद्योग, डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन ,ई-कॉमर्स, ऑनलाइन बाजार, जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा में अग्रतर उन्नति की है। इन सभी परिस्थितियों में वैश्विक दक्षिण के राष्ट्र – राज्यों के लिए भारत का नेतृत्व समकालीन में आशा की किरण प्रतीत हुआ है जो अन्य राष्ट्र- राज्यों के लिए समान सहयोग और सतत विकास के लिए अनथक प्रयास कर रहा है।

 

                                                

गुटनिरपेक्ष आंदोलन( नाम) का नेतृत्व करने के अपने गरिमामयी  और उज्जवल इतिहास के साथ- साथ उभरता भारत समकालीन में वैश्विक भू- राजनीति में एक गतिशील एवं ऊर्जावान भूमिका निभाने के लिए अपने सामाजिक आर्थिक, सामरिक और भू – राजनीतिक और शक्ति संरचना को उन्नयन कर रहा है। वैश्विक स्तर पर महा शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा  बढ़ाने में सहयोग की संकल्पना दुर्लभ  प्रत्यय हो चुका है। कोविड महामारी, रूस- यूक्रेन युद्ध, इजरायल ईरान संकट, वेनेजुएला संकट और वैश्विक स्तर पर गुटिकरण की राजनीति, एकाधिकार प्रभुत्व राजनीति, एकध्रवीय वैश्विक व्यवस्था बनाने की राजनीति, आर्थिक एवं राजनीतिक संगठनों ने ‘ वैश्विक दक्षिण ‘ की संकल्पना को प्रसांगिक बना दिया है। भारत  वैश्विक दक्षिण के लिए प्रमुख ‘ राज्यकारक ‘ के रूप में उभर रहा है जो वैश्विक दक्षिण के राष्ट्र – राज्यों के राष्ट्रीय हितों और भू – राजनीति के मुद्दों को वैश्विक मंच पर जोरदार ढंग से उठा रहा है। वैश्विक स्तर पर सामाजिक आर्थिक असमानता, भुखमरी, आतंकवाद ,हथियारबंद अंतरराज्यीय  समस्याएं  बढ़ी हैं।

                             

भारत ने वर्ष 2023 में  जी- 20की अध्यक्षीय मंच से वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से उठाया था, ब्रिक्स के मंच से भी वैश्विक दक्षिण की आवाज को, वैश्विक अध्यक्षीय सम्मेलन के मंच एवं संयुक्त राष्ट्र के मंच से भी  ‘ वैश्विक दक्षिण’ की आवाज को बढ़ाया है। वैश्विक संबंधों में यह क्रांतिकारी अवसर संस्थाओं को “समावेशी विश्व व्यवस्था” बनाने में महत्वपूर्ण और प्रेरक भूमिका निभा रहा है। भारत वैश्विक दक्षिण राष्ट्रों में ‘ अग्रणी ‘ की भूमिका में नेतृत्व कर रहा है जो वैश्विक स्तर के मंचों के भीतर एवं उनमें एक मजबूत समर्थन नेटवर्क बनाने के लिए अपने ‘ राज्यकारक ‘ नेतृत्व में राजनीतिक कारक की भूमिका बना रहा है।

 

डॉ.बालमुकुंद पाण्डेय 

राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना केशवकुंज,  झंडेवालान,  नई दिल्ली।

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