टीम में जगह के लिये अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी : भारतीय महिला हॉकी कोच मारिन

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नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) अतीत की उपलब्धियां कोच शोर्ड मारिन की टीम में चयन की गारंटी नहीं है और भारतीय महिला हॉकी टीम के लिये बेहद महत्वपूर्ण वर्ष 2026 में सभी खिलाड़ियों को टीम में जगह के लिये अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी ।

तोक्यो ओलंपिक 2021 में मारिन के मार्गदर्शन में ऐतिहासिक चौथे स्थान पर रही भारतीय महिला टीम पेरिस ओलंपिक 2024 के लिये क्वालीफाई करने में नाकाम रही और पिछले साल एफआईएच प्रो लीग से भी बाहर हो गई । इसके अलावा एशिया कप के जरिये विश्व कप के लिये सीधे क्वालीफाई करने में भी नाकाम रही ।

हैदराबाद में आठ से 14 मार्च तक होने वाले विश्व कप क्वालीफायर से पहले टीम के साथ लौटे मारिन कोई कोताही नहीं बरतना चाहते और जरूरत पड़ने पर कड़े फैसले लेने से भी नहीं हिचकिचायेंगे ।

उन्होंने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘ हमने छह जूनियर खिलाड़ियों को ग्रुप में रखा है । भारतीय टीम के साथ लौटने की घोषणा होने के तुरंत बाद से मैने हॉकी इंडिया लीग में जूनियर खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखना शुरू किया । ये लड़कियां सीनियर खिलाड़ियों के साथ अच्छा तालमेल शिविर में दिखा रहीं हैं ।’’

यह पूछने पर कि तोक्यो ओलंपिक टीम का हिस्सा रहे सीनियर खिलाड़ियों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है , उन्होंने कहा ,‘‘ सीनियर्स समझते हैं कि अतीत की उपलब्धियां मायने नहीं रखती और टीम में जगह बनाने के लिये सभी को अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी । वे भी इससे सहमत हैं और टीम खेल में यह आम बात है ।’’

उन्होंने दोहराया कि चीजें रातोंरात नहीं बदलेगी लेकिन कहा कि टीम धीरे धीरे वहां तक पहुंच रही है ।

उन्होंने कहा ,‘‘ हम छोटे छोटे कदम ले रहे हैं । जब मैं और वेन (लोम्बार्ड) यहां आये तब कई खिलाड़ियों को कुछ न कुछ फिटनेस समस्या थी । यह रातोरात ठीक नहीं होगा और हमें एहतियात भी बरतनी होगी ।’’

मारिन ने लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 की दीर्घकालिन रणनीति भी बनाई है लेकिन अभी उनका फोकस वहां तक पहुंचने की प्रक्रिया पर है । तोक्यो में उन्होंने दिल जीते लेकिन उन्हें भी पता है कि पिछले कुछ साल के प्रदर्शन को देखते हुए 2028 की राह और भी कठिन है ।

उन्होंने कहा ,‘‘ तोक्यो में हमसे किसी को उम्मीद नहीं थी लेकिन आज भी हम नौवे नंबर पर है । टीम पेरिस ओलंपिक के लिये क्वालीफाई नहीं कर सकी और प्रो लीग से बाहर हो गई । हम शीर्ष चार में नहीं हैं लिहाजा इस बार भी नये सिरे से शुरूआत करनी होगी ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ जब आप ओलंपिक के लिये क्वालीफाई नहीं करते तो अगले ओलंपिक की तैयारी और जल्दी शुरू कर देते हैं । बेल्जियम इसका उदाहरण है जिसने ओलंपिक के लिये क्वालीफाई नहीं किया तब अगले ही दिन से नये चक्र की तैयारी शुरू कर दी । अब आप देखिये कि वह टीम कहां है ।’’

मारिन की प्राथमिकता में सिर्फ फिटनेस नहीं है बल्कि वह मानसिक अनुकूलन और टीम में एकजुटता पर भी काम कर रहे हैं ।

उन्होंने कहा ,‘‘ फिटनेस के अलावा टीम का माहौल, एक दूसरे को जानना और कार्यभार प्रबंधन भी अहम है । मुझे यह भ्री जानना था कि इन खिलाड़ियों ने पिछले कुछ साल में क्या सीखा, क्या असरदार रहा और क्या नहीं । अभी बहुत कुछ चल रहा है ओर टीम में ताजगी लाना अहम है ताकि हर खिलाड़ी आनंद के साथ खेले ।’’

भारतीय टीम मानसिक अनुकूलन पर विशेषज्ञ की सहायता ले रही है और ड्रेसिंग रूम का मंत्र यही है कि एक दूसरे को उसी तरह स्वीकार करें, जैसे वे हैं और यह भी समझें कि दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं ।

कोच ने कहा ,‘‘ मानसिक अनुकूलन काफी अहम है क्योंकि मैं हमेशा कहता हूं कि आपके भीतर की आवाज ही आपकी सबसे बड़ी दुश्मन है । नकारात्मक विचारों से बचना जरूरी है और यह एक सत्र में नहीं हो सकता । यह एक प्रक्रिया है। हमने इसके लिये विशेषज्ञ की सेवायें ली है । खिलाड़ियों की प्रोफाइलिंग के साथ यह हो रहा है ताकि वे खुद को और अपने साथी खिलाड़ियों को बेहतर समझ सकें ।’’

टीम एकजुटता पर अत्यधिक फोकस के कारणों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,‘‘ मैं पिछले कुछ साल से टीम के साथ नहीं था और मैं पिछले कोचों पर टिप्पणी नहीं कर सकता । मैने जो नोटिस किया और जो फीडबैक मुझे मिला कि इस पहलु़ (टीम की एकता) पर काम करना जरूरी है ।’’

ट्रेनिंग में एआई के इस्तेमाल की संभावना के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि अभी इसमें समय लगेगा ।

उन्होंने कहा ,‘‘ पिच पर हम एआई का इस्तेमाल नहीं कर सकते लेकिन वीडियो विश्लेषण में कुछ हद तक हो रहा है । एआई से सही चीजें निकालने के लिये काफी डेटा चाहिये और यह चुनौतीपूर्ण है । आने वाले समय में यह होगा लेकिन अभी बहुत छोटी चीजों पर ही इसकी मदद ली जा सकती है ।’’

तीन ओलंपिक और विश्व कप खेल चुके अर्जेंटीना के मटियास विया टीम से विश्लेषण कोच के रूप में जुड़े हैं और मारिन ने कहा कि उनका अनुभव मैदान के भीतर और बाहर काफी काम आयेगा ।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्व कप और एशियाई खेलों के बीच ज्यादा समय नहीं होना चिंता का विषय नहीं है क्योंकि 2018 में भी इस स्थिति से टीम गुजर चुकी है ।

उन्होंने कहा ,‘‘ हमने 2018 एशियाई खेलों में 26 साल बाद रजत पदक जीता और विश्व कप क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे । विश्व कप के जरिये एशियाई खेलों में प्रदर्शन बेहतर हो सकता है क्योंकि हम सभी जानते हैं कि एशियाई खेलों के जरिये ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करना कितना जरूरी है ।’’

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