ट्रंप के खिलाफ शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में भारतीय मूल के वकील

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न्यूयॉर्क, 21 फरवरी (भाषा) अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक प्रभाव वाले वैश्विक टैरिफ को निरस्त करने संबंधी ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में एक भारतीय मूल के वकील हैं, जिन्होंने अमेरिका की शीर्ष अदालत में इन शुल्कों की अवैधता के खिलाफ दलील दी।

भारतीय प्रवासी के पुत्र और राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में पूर्व अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल रहे नील कात्याल ने छोटे व्यवसायों की ओर से इस महत्वपूर्ण टैरिफ मामले में बहस की और जीत हासिल की।

फैसला आने के तुरंत बाद कात्याल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘विजय।’’

कात्याल ने एमएस नाउ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘आज जो कुछ हुआ है वह अमेरिकी प्रणाली में बेहद खास है। मैं प्रवासी माता-पिता का बेटा हूं, मैं अदालत में गया और अमेरिका के छोटे व्यवसायों की ओर से यह दलील दी, ‘‘देखिए, राष्ट्रपति अवैध तरीके से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपना पक्ष रखने में सक्षम था, उन्होंने मुझसे बेहद कठिन सवाल पूछे। यह बहुत ही तीखी और गहन मौखिक बहस थी, और अंत में उन्होंने मतदान किया — और हम जीत गए।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘इस देश की यही बात असाधारण है। हमारे पास एक ऐसी व्यवस्था है जो स्वयं को सुधारती है, जो हमें यह कहने की अनुमति देती है—‘आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन फिर भी आप संविधान का उल्लंघन नहीं कर सकते।’ मेरे लिए आज का दिन इसी बात का प्रतीक है।’’

कात्याल का जन्म शिकागो में चिकित्सक मां और अभियंता पिता के घर 1970 में हुआ था। उनके माता पिता भारत से यहां आये थे।

कात्याल वॉशिंगटन डीसी स्थित मिलबैंक एलएलपी के कार्यालय में साझेदार हैं और कंपनी के कानूनी एवं मध्यस्थता समूह के सदस्य हैं।

फैसले के बाद जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिकी शीर्ष अदालत ने कानून के शासन और पूरे अमेरिका के नागरिकों के पक्ष में मजबूती से खड़े होकर अपना कर्तव्य निभाया।

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