भारतीय नौसेना देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सर्तक है : राष्ट्रपति मुर्मू

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विशाखापत्तनम, 18 फरवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विशाखापत्तनम में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा के दौरान कहा कि भारतीय नौसेना देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सतर्क रहने के साथ-साथ व्यापक समुद्री वाणिज्य गतिविधियों की स्थिरता में भी योगदान दे रही है।

बंगाल की खाड़ी में भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर सवार होकर विशाखापत्तनम तट पर अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू…. आईएफआर) की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय नौसेना समुद्र में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और खतरों के खिलाफ रक्षा और प्रतिरोध के एक विश्वसनीय साधन के रूप में क्षेत्र में तैनात है।

मुर्मू ने कहा, “भारतीय नौसेना देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सर्तक है और व्यापक समुद्री वाणिज्यिक गतिविधियों की स्थिरता में योगदान दे रही है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना दुनिया भर की नौसेनाओं के साथ सद्भावना को बढ़ावा देने और विश्वास, भरोसे व दोस्ती का सेतु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राष्ट्रपति के अनुसार, विशाखापत्तनम का समुद्री इतिहास गौरवशाली रहा है। उन्होंने कहा कि आज का आयोजन विशाखापत्तनम के निरंतर नौसैनिक महत्व को रेखांकित करता है।

भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान (ईएनसी) का मुख्यालय विशाखापत्तनम में स्थित है।

भारत और उसके मित्र देशों की नौसेनाओं के युद्धपोतों के प्रभावशाली बेड़े और नौसैनिकों के प्रदर्शन को देखकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने उन्हें बधाई दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि आईएफआर समुद्री परंपराओं के प्रति राष्ट्रों के बीच एकता, विश्वास और सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के जहाज और अलग-अलग देशों के नाविक एकजुटता की भावना का प्रदर्शन करते हैं।

मुर्मू ने समुद्रों के साथ भारत के संबंधों पर कहा कि यह संबंध सदियों पुराने, गहरे और स्थायी हैं। उन्होंने महासागरों को भारत के लिए वाणिज्य, संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मार्ग बताया।

राष्ट्रपति ने कटक में ‘कार्तिक पूर्णिमा’ से शुरू होने वाले सप्ताह के दौरान उत्साहपूर्वक मनाए जाने वाले ‘बाली यात्रा’ उत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह त्योहार वर्तमान ओडिशा के प्राचीन नाविकों के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने रेखांकित किया कि यह उत्सव प्राचीन कलिंग काल से विभिन्न उद्देश्यों के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया की नियमित समुद्री यात्राओं की परंपरा को परिलक्षित करता है।

राष्ट्रपति ने कहा, “इन यात्राओं ने व्यापार और वस्तुओं, विचारों और मूल्यों के आदान-प्रदान और उनकी भावना में योगदान दिया है, जिसने पूरे क्षेत्र में एक साझा सांस्कृतिक चेतना को आकार दिया।”

मुर्मू ने कहा कि यह बेड़ा समीक्षा भारत के ‘महासागर’ के एकीकरण की भावना को आगे बढ़ाती है, जिसका अर्थ इस क्षेत्र में सुरक्षा और विकास की पारस्परिक तथा ऐतिहासिक उन्नति है।

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