भारतीय तटरक्षक बल : समुद्री सीमा पर सन्नद्ध-सजग प्रहरी

0
er45

लगभग पांच दशक पहले जब मैं एक कस्बे में रहकर प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण कर रहा था, तब कक्षा में एक छात्र इलेक्ट्रानिक घड़ी और खिलौने लेकर आया करता था। वे शायद जापान में बने थे और चोरी-छिपे भारतीय चोर बाजारों में पहुंचाया जाता था, जहां से अमीर और शौकिया लोग महंगे दामों पर खरीदते थे। तब उस तरह का सामान खुले बाजार में वहां उपलब्ध नहीं था, तो सभी की पहुंच में भी नहीं था। कक्षा में अन्य सभी बच्चे उसे घेरे रहते और उसके नखरे उठाते, पढ़ाई-लिखाई में कुछ मदद भी करते। उसकी घड़ी पूरे स्कूल में कौतूहल का केंद्र हुआ करती। सभी बच्चे उसमें दिन, दिनांक, समय आदि बटन दबा-दबा कर देखते, मैंने भी देखा था। बहुत बाद में पता चला कि ऐसी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं और सोना समुद्र के रास्ते तस्करी करके लाया जाता है क्योंकि तब समुद्री रास्तों और तटीय क्षेत्रों में समुचित निगरानी के प्रबंध का अभाव था। मादक पदार्थों, सोना, समुद्री जीव-जंतुओं और अन्य वस्तुओं की बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी को रोकने, समुद्री हितों की रक्षा करने, समुद्री कानूनों को लागू करने, तटीय सुरक्षा सुनिश्चित करने, समुद्री पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करने, खतरे में पड़े पोतों व नौकाओं का बचाव कार्य करने तथा समुद्री आपदा के समय अविलम्ब सहायता उपलब्ध कराने हेतु के.एफ. रुस्तम जी की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश पर नौ सेना से प्राप्त कुछ विमान, नौकाओं एवं अन्य संसाधनों के साथ 1 फरवरी, 1977 को भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना की गयी थी, जो रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। बाद में संसद में पारित तटरक्षक बल अधिनियम 1978 के द्वारा 18 अगस्त, 1978 को भारतीय तटरक्षक बल का विधिवत् उद्धघाटन किया गया था। किंतु भारतीय तटरक्षक बल अपनी वर्षगांठ 1 फरवरी को ही मनाता है। इस अवसर पर उत्कृष्ट योगदान देने वाले सैनिकों एवं अधिकारियों को सेवा मैडल प्रदान कर सम्मानित किया जाता है। उल्लेखनीय है कि भारतीय तटरक्षक बल आज अत्याधुनिक पोतों, गस्ती नौकाओं, विमानों, राडार आदि खोजी यंत्रों एवं समर्पित ध्येयनिष्ठ सैनिकों की संख्या के आधार पर विश्व का चौथा सबसे बड़ा तटरक्षक बल बन चुका है। भारतीय तटरक्षक बल का आदर्श वाक्य है – वयं रक्षाम: अर्थात् हम रक्षा करते हैं जो बल की कर्तव्यनिष्ठा, सतर्कता एवं स्वाभिमानी गरिमामय छवि का परिचायक है।

        किसी भी देश के आंतरिक एवं बाहरी खतरों एवं चुनौतियों से निबटने के लिए सैन्य या अर्धसैन्य बल महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करते हैं। यह देश की सम्प्रभुता, अखंडता एवं सतत विकास के लिए आवश्यक होता है। भारत के संदर्भ में जमीनी सीमा के साथ समुद्री सीमा की सुरक्षा करते हुए देश में शांति, सुरक्षा एवं विकास का वातावरण बनाये रखने की एक बड़ी जिम्मेदारी स्वाभाविक है। भारत भूमि तीन ओर से समुद्र से घिरी है। पश्चिम में अरब सागर, पूरब में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में हिंद महासागर तथा सैकड़ों की संख्या में द्वीप। वर्ष 2025 में माप अनुसार भारत की समुद्री सीमा लगभग 11-12 हजार किमी है, जिसमें मुख्य भूमि तट 5422 किमी तथा द्वीपीय तट 7516 किमी है, पर इनमें आंशिक बदलाव होता रहता है। भारत की क्षेत्रीय समुद्र जल सीमा 12 समुद्री मील अर्थात् 22 किमी से कुछ अधिक है। भारत के समुद्री तट 9 राज्यों – गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, ओडिसा, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक एवं गोवा तथा 4 केंद्र शासित प्रदेशों को स्पर्श करते हैं। सबसे बड़ी समुद्री तट रेखा गुजरात की है जो 2340 किमी है, जबकि गोवा की सबसे कम। भारतीय तटरक्षक बल अपनी सम्पूर्ण शक्ति एवं सामर्थ्य के साथ समुद्री तटों की निगरानी करते हुए समुद्री क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए भी बद्धपरिकर रहता है। तेल टैंकरों से तेल रिसाव, नाविकों को सहायता, मत्स्य एवं खनिज के उचित दोहन में मदद, समुद्री जीवन पर वैज्ञानिक शोध एवं आंकड़े तथा संकट में मानवीय सहायता उपलब्ध कराना भारतीय तटरक्षक बल की प्रमुख भूमिकाएं हैं। भारतीय तटरक्षक बल के सेवा क्षेत्र को पांच क्षेत्रों में विभाजित किया गया है जिसके मुख्यालय मुम्बई, चैन्नै, गांधीनगर, पोर्ट ब्लेयर एवं कोलकाता में हैं। समन्वय हेतु मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

         भारतीय तटरक्षक बल देश का गौरव है। वह सदैव समुद्र तटों की सुरक्षा करते हुए मादक पदार्थों, हथियारों, सोना, जीव-जंतुओं की तस्करी पर लगाम लगाने एवं अवैध मानव आव्रजन की रोकथाम कर देश में सुरक्षित परिवेश बनाने में सफल हुआ है। युद्ध के समय नौ सेना की मदद कर उसकी शक्ति में वृद्धि कर देता है। कह सकते हैं, भारतीय तटरक्षक बल समुद्री तटों पर सन्नद्ध एवं सजग होकर अपने कर्तव्य पालन में जुटे हुए हैं तभी हम देशवासी अपने-अपने कार्यों को शांति एवं सुगमता के साथ करते हुए देश के विकास में योगदान कर रहे हैं। भारतीय तटरक्षक बल की यशगाथा अनवरत् ऊर्ध्वगामी हो, उसकी शौर्य पताका पराक्रम के आकाश पर फहरती रहे, यही कामना है।

 

प्रमोद दीक्षित मलय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *