नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) जोहो कॉरपोरेशन के सह-संस्थापक एवं प्रमुख वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बू ने बुधवार को कहा कि युवा एवं अधिक आशावादी आबादी के नई प्रौद्योगिकी को अपनाने से अगले 10 वर्ष में भारत, कृत्रिम मेधा (एआई) के इस्तेमाल में अमेरिका से भी आगे निकल सकता है।
यहां ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में वेम्बू ने कहा कि जिस तरह भारत में एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) बड़े पैमाने पर अपनाई गई, उसी तरह कृत्रिम मेधा भी जन-स्तर तक पहुंच सकती है।
फाइबर ऑप्टिक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2000 के दशक में अमेरिकी उद्यम पूंजी निवेशकों ने दूरसंचार कंपनियों, खासकर फाइबर ऑप्टिक में ‘‘दसियों अरब डॉलर’’ लगाए जबकि आज यह प्रौद्योगिकी भारत में हर जगह है, लेकिन अमेरिका में उतनी व्यापक स्तर पर नहीं दिखती।
उन्होंने कहा, ‘‘ …10 साल में…कृत्रिम मेधा अपनाने के मामले में भारत, अमेरिका से भी आगे निकल सकता है।’’
वेम्बू ने कहा कि इसकी वजह यह है कि ‘‘ हमारे पास बेहद युवा एवं आशावादी आबादी है। हमारे यहां अत्यधिक संदेह करने वाली आबादी नहीं है… और यह एक तरह का वरदान है।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘हिचकिचाने वाली आबादी’’ के विपरीत भारत में कृत्रिम मेधा को स्वीकार करने और अपनाने का खुलापन कहीं अधिक है।
देश को इस क्षेत्र में आगे रखने के लिए वेम्बू ने युवा उद्यमियों और स्टार्टअप से ‘‘आशावादी प्रयोग’’ करने एवं चुनौतियों से लगातार सीखते रहने का आग्रह किया।