कर्मचारियों की मिलीभगत से हरियाणा सरकार के खातों में धोखाधड़ी हुई: आईडीएफसी बैंक

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मुंबई, 23 फरवरी (भाषा) आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वी. वैद्यनाथन ने सोमवार को कहा कि बैंक के कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत के जरिये हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया था कि उसके कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।

शेयर बाजार खुलने से पहले निवेशकों एवं विश्लेषकों के लिए आयोजित विशेष ‘कॉन्फ्रेंस कॉल’ में वैद्यनाथन ने कहा कि धोखाधड़ी के परिणामस्वरूप और किसी भी तरह के दबाव को पहले से ही पहचानने की अपनी नीतियों के अनुरूप बैंक कुछ प्रावधान करेगा।

उन्होंने कहा कि हालांकि, इससे मुनाफे पर बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है। उच्च शुद्ध ब्याज मुनाफा और ऋण लागत में सुधार से मदद मिलेगी।

अधिकारी ने कहा, ‘‘ स्वतंत्र आधार पर हम लाभप्रदता के लिहाज से चौथी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे थे।’’

हरियाणा सरकार ने कथित धोखाधड़ी के आरोपों के मद्देनजर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ-साथ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भी सरकारी कार्यों के लिए अपनी समिति से बाहर (डी-एम्पैनल्ड) कर दिया है।

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने कथित तौर पर धोखाधड़ी से खाते खोलने के मामले में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है।

वैद्यनाथन ने बताया कि सलाहकार कंपनी केपीएमजी द्वारा किया जा रहा स्वतंत्र ‘फोरेंसिक ऑडिट’ चार से पांच सप्ताह में पूरा होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमने केपीएमजी को कल (रविवार) ही इसके लिए नियुक्त किया है… मेरी समझ के अनुसार ऐसी प्रक्रियाएं आमतौर पर चार-पांच सप्ताह लेती हैं।’’

प्रबंध निदेशक ने कहा कि बैंक ने करीब 590 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आकलन किया है, जिसमें 490 करोड़ रुपये मिलान (रिकंसिलिएशन) के बाद पहचाने गए और अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये आंतरिक जांच के दौरान स्वयं चिन्हित किए गए।

उन्होंने संकेत दिया कि यह राशि आगे बढ़ने के आसार नहीं है।

वैद्यनाथ ने कहा, ‘‘ हमने यह आंकड़ा वर्तमान आकलन के आधार पर जारी किया है । हमें इसमें आगे कोई बड़ा बदलाव होने के आसार नजर नहीं आते।’’

उन्होंने बताया कि वसूली और 35 करोड़ रुपये का ‘‘ कर्मचारी बेईमानी बीमा’’ कवर, बैंक पर प्रभाव को कम कर सकता है।

वैद्यनाथन ने इस प्रकरण को जाली भौतिक चेक लेनदेन के जरिये कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की ‘‘मिलीभगत’’ का मामला बताते हुए कहा कि यह मुद्दा एक इकाई और एक ग्राहक समूह तक सीमित था। यह किसी प्रणालीगत ‘रिपोर्टिंग’ त्रुटि का मामला नहीं है।

उन्होंने कहा कि बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, नियामकों और लेखा परीक्षकों को सूचित किया है तथा बैंकिंग तंत्र में वसूली एवं ‘लियन-मार्किंग’ की कार्रवाई शुरू की है।

‘लियन-मार्किंग’, बैंक या किसी वित्तीय संस्थान द्वारा खाते की एक निश्चित राशि को अस्थायी रूप से ‘फ्रीज’ (ब्लॉक) करने की प्रक्रिया है।

वैद्यनाथन ने बताया कि हेराफेरी की राशि हरियाणा सरकार से जुड़े जमा बैंक की कुल जमाओं का लगभग 0.5 प्रतिशत हैं, जबकि केंद्र एवं राज्य इकाइयों सहित कुल सरकारी जमाएं जमा आधार का आठ से 10 प्रतिशत हैं।

इस प्रकरण के मद्देनजर बीएसई पर शुरुआती कारोबार में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई।

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