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एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के बढ़ते प्रभाव के चलते हम अपने परंपरागत घरेलू नुस्खों को भूलते जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल करके परिवार की बड़ी बूढ़ी महिलाएं परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य की रक्षा करती थी।
देखने में छोटे व साधारण से दिखने वाले ये नुस्खे बड़े काम के होते हैं। उन पारंपरिक दादी मां के घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करके अनेकों बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है। नीचे दादी मां के कुछ उपयोगी नुस्खे प्रस्तुत हैं:-
 यदि भूख न लगे तो पुदीने का रस सुबह-शाम पीना लाभदायक होता है।
 वमन होने पर इमली का शर्बत पिएं।
 यदि आप नकसीर से ग्रसित हैं तो धनिया, किशमिश और मिश्री रात को पानी में डाल दें तथा सुबह छानकर पी लें। नकसीर ठीक हो जाएगी।
 नींबू का रस तथा तुलसी के पत्तों का रस दोनों को मिलाकर लगाने से दाद व खुजली में लाभ मिलता है।
 कुछ दिन लगातार केला खाने से श्वेत प्रदर मंे लाभ मिलता है।
 यदि सर्दी के कारण दांतों में दर्द हो रहा हो तो हल्दी का टुकड़ा दंातों के नीचे रखें।
 आंवले का मुरब्बा खाने से पित्त रोग ठीक होता है।
 कब्ज होने पर कच्चा लहसुन खाने से लाभ मिलता है।
 यदि पेशाब रूक रूक कर आए तो मूली व शलजम खायें। इससे पेशाब खुलकर आने लगता है।
 गठिया रोग होने पर रोज एक सेब खाएं। इस रोग से छुटकारा मिलेगा।
 चेहरे की झाईयां, मुंहासे, झुर्रियां व खुश्की दूर करने के लिए नींबू के रस में शहद, गुलाब जल और ग्लिसरीन सम मात्रा में मिलाकर रोज चेहरे पर लगाएं।
 पेचिश होने पर खजूर या दही खाने से लाभ मिलता है।

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