सब्जियों और फलों का सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम माना जाता है क्योंकि इनमें ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कई बीमारियों की संभावनाओं को कम करते हुए व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखते हैं। अभी हाल ही में ब्रिटिश शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक शोध में यह पाया गया कि हरी सब्जियां धमनियों को सख्त होने से रोकती हैं। इनमें ल्यूटिन नामक ऐसा तत्व पाया जाता है जो रक्त धमनियों को सख्त होने से रोकता है।
विशेषज्ञों ने अपने शोध में विभिन्न व्यक्तियों की धमनियों की जांच की और पाया कि जिन लोगों के रक्त में ल्यूटिन की मात्रा अधिक पायी गयी उनकी धमनियां कम सख्त पायी गयी और जिन लोगों के रक्त में ल्यूटिन की मात्रा कम थी, उनकी धमनियों में संकुचन अधिक पाया गया। इस अध्ययन से इस बात पर भी प्रकाश पड़ा है कि फलों व सब्जियों का अधिक सेवन करने वाले व्यक्तियों को हृदय रोग होने की संभावना कम क्यों होती है।
टमाटर प्रोस्टेट कैंसर और हृदय रोगों की संभावना कम करता है
अभी तक विशेषज्ञों का मानना था कि टमाटर में पाया जाने वाला तत्व लाइकोपीन ‘प्रोस्टेट कैंसर की संभावना को कम करता है और अब नवीनतम शोधों से पता चला है कि टमाटर का सेवन हृदय रोगों की संभावना को कम करता है। हाल ही में स्काटलैण्ड में रॉवट रिसर्च इन्स्टीट्यूट के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया है कि टमाटर में पी 3 नामक एक यौगिक पाया जाता है जो रक्त प्लेटलेेट जमने की प्रक्रिया को कम करता है। इस शोध के विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन चार टमाटरों का सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। टमाटरों का रस, कच्चा या पका कर किसी भी तरह खाना अच्छा है। स्ट्राबेरी और ग्रेपफ्रूट में भी पी थ्री नामक यह यौगिक पाया जाता है पर टमाटर में इसकी मात्रा अधिक होती है।
सोयाबीन हृदय के लिए अच्छा
विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन कोलेस्ट्रोल रहित प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और फोलिक एसिड का अच्छा स्रोत है। सोयाबीन में पाए जाने वाले तत्व हृदय रोग की संभावना कम करते हैं क्योंकि यह एल डी एल बुरे कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करता है। यही नहीं, यह ओस्टिओपोरोसिस रोग की संभावना को भी कम करता है इसलिए सोयाबीन का सेवन स्वास्थ्यप्रद है।
तनाव बढ़ाती है सिगरेट
हाल ही में हुए एक नवीनतम शोध के अनुसार सिगरेट पीने वाले व्यक्तियों का यह सोचना बिलकुल गलत है कि सिगरेट पीने से वे तनावमुक्त होते हैं बल्कि सिगरेट में युक्त निकोटिन पर निर्भरता तनाव का मुख्य कारण है। सिगरेट छोड़ना कठिन तो होता है पर सिगरेट पीना छोड़ने से तनाव तो कम होता है, साथ ही मूड भी ठीक रहता है, इसलिए सिगरेट छोड़ना ही व्यक्ति के लिए हितकर है।
शारीरिक श्रम मुक्त रेडिकल्स क्षतिग्रस्त होने से रोकता है
हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के विशेषज्ञों द्वारा किए एक शोध में उन्होंने 6 महीने तक 68 वर्ष के 62 व्यक्तियों जो सप्ताह में तीन दिन वजन उठाने यानी शारीरिक श्रम का कार्य करते थे, की शारीरिक जांच कर पाया कि उनमें फ्री रेडिकल्स को क्षति कम पायी गयी। फ्री रेडिकल्स वे मालीक्यूल होते हैं जो सैल और टीशु पर आक्रमण कर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं और कई बीमारियों की संभावना बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वजन उठाने वाले व्यायाम के कारण शायद उनमें फ्री रेडिकल्स की क्षति कम पायी गयी।
विशेषज्ञों ने इस शोध में यह अंतर जानने की कोशिश की कि कम वजन या अधिक वजन क्या इस क्षति पर कोई प्रभाव डालता है या नहीं और पाया कि इससे कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता कि कम वजन उठाया जाए या अधिक। सबसे महत्त्वपूर्ण है शारीरिक व्यायाम। जिस ग्रुप ने बिलकुल शारीरिक श्रम नहीं किया, उनमें शारीरिक श्रम वाले ग्रुप की तुलना में मुक्त रेडिकल्स को 13 प्रतिशत अधिक क्षति पायी गयी।
महिलाओं के लिए घातक है धूम्रपान
येल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने हाल ही में एक शोध में पाया कि टीनएजर्स के लिए धूम्रपान का सेवन बहुत ही हानिकारक है। छोटी आयु में इस का सेवन मस्तिष्क को बहुत ही नुकसान पहुंचाता है। किशोरावस्था में धूम्रपान से मस्तिष्क की किसी सूचना को बोधगम्य करने की गति व उन्हें याद रखने की क्षमता में कमी आती है। उनके कार्य करने की क्षमता को भी क्षति पहुंचती है। इसके अतिरिक्त एक अन्य शोध में यह पाया गया कि महिलाओं को पुरूषों की तुलना में धूम्रपान करने से अधिक नुकसान पहुंचता है।
धूम्रपान के घातक परिणामों के फलस्वरूप महिलाएं पुरूषों की तुलना में अपनी आयु में से 8 वर्ष की कमी कर लेती हैं जबकि यह कमी पुरूषों में सिर्फ 3 वर्ष होती है। इस अंतर का कारण जानने के लिए विशेषज्ञ प्रयासरत हैं पर अभी तक उनका यही विचार है कि इसका कारण यह है कि महिलाएं पुरूषों की तुलना में फेफड़ों के कैंसर के साधारण प्रकार एडीनोकार्सिनोमा के प्रति अधिक ग्रहणशील होती हैं।
कम्प्यूटर परफारमेंस में सुधार नहीं, कमी लाता है
कम्प्यूटर का बढ़ता प्रयोग क्या बच्चे की परफारमेंस को प्रभावित करता है ? इसी बात का पता लगाया गया एक शोध के दौरान। इस शोध में 15 वर्ष की आयु के लगभग 100,000 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। ये विद्यार्थी विकसित देशों के भी थे और विकासशील देशों के भी। इस शोध से यह सामने आया कि जिन बच्चों को अपने घरों में भी कम्प्यूटर उपलब्ध थे, उन्होंने विज्ञान, गणित जैसे विषयों में अच्छा परफार्म करने की बजाय सही परफार्म नहीं किया।
विशेषज्ञों के अनुसार कम्प्यूटर बच्चे को पढ़ाई से दूर ले जाता है क्योंकि जो ज्ञान कम्प्यूटर द्वारा मिलता है, वह कुशल ज्ञान नहीं होता और न ही सीखने का कुशल तरीका क्योंकि कम्प्यूटर का प्रयोग सीखने के अतिरिक्त दूसरे कार्यों के लिए अधिक किया जाता है। यही नहीं, इस शोध से यह भी सामने आया कि जो कार्य किताबें कर सकती हैं वह कम्प्यूटर नहीं। वे बच्चे जिनके घरों में 500 से भी अधिक किताबें पाई गई, उन्होंने किताबें न पढ़ने वाले बच्चों की तुलना में गणित, विज्ञान जैसे विषयों में अच्छा परफार्म किया।
सामान्य आयु-सीमा कम करता है मोटापा
हाल ही में अमेरिका में हुई एक रिसर्च के दौरान सामने आया कि वहां पर मोटापे के कारण सामान्य आयु सीमा में कमी हो रही है। शिकागो में यूनिवर्सिटी ऑफ इलीनोइस के विशेषज्ञ एस.जी. ओलिसशेंसकी व उनके सहयोगियों द्वारा की गई रिसर्च के अनुसार मोटापे के कारण सामान्य आयु सीमा जो 77.6 वर्ष है, उसमें 2-5 वर्ष की कमी पाई गई। यह कमी कैंसर व हृदय रोगों से होने वाली कमी की अपेक्षा अधिक है।
अमेरिका में पिछली दो शताब्दियों से आयु सीमा में जो वृद्धि आ रही थी, इस शोध ने इसके विपरीत परिणाम दिए हैं। विशेषज्ञ ओलिसशेंसकी के अनुसार ’हमारी आगे आने वाली पीढ़ी अस्वस्थ जीवन व्यतीत कर रही है और उनकी आयु सीमा भी कम होने की संभावना अधिक है। बच्चों में मोटापा कई गंभीर रोगों की संभावना को बढ़ा कर उनकी आयु-सीमा पर प्रभाव डाल रहा है।
